विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए प्रयागराज में 210 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण, 500 काश्तकार प्रभावित हो सकते

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प्रयागराज 
विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए प्रयागराज में 210 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इससे तीन तहसीलों के हजारों किसानों को फायदा मिलेगा। वहीं, इस संबंध में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर प्राथमिक सर्वे रिपोर्ट सोमवार को जिला प्रशासन को प्राप्त हो गई। अब विस्तृत सर्वे के दौरान अधिग्रहित की जाने वाली भूमि पर आने वाले काश्तकारों का आकलन किया जाएगा, जिसके बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

विंध्य एक्सप्रेसवे प्रयागराज जिले की सोरांव, फूलपुर और हंडिया तहसीलों से होकर गुजरेगा। यूपीडा ने पूर्व में प्रशासन को भेजी रिपोर्ट में इन तीनों तहसीलों के 73 गांवों में भूमि की आवश्यकता बताई थी। इसके आधार पर संबंधित एसडीएम से सर्वे कराकर आवश्यक भूमि का विवरण मांगा गया। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हंडिया तहसील में 78 हेक्टेयर, फूलपुर में 68 हेक्टेयर और सोरांव में 64 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी।

प्रशासन का अनुमान है कि भूमि अधिग्रहण की जद में 400 से 500 काश्तकार आ सकते हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह संख्या फिलहाल अनुमानित है। लेखपालों की विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद प्रभावित किसानों और भूमि का अंतिम आंकड़ा स्पष्ट हो सकेगा।

ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के लिए सावन में शुरू होगा सर्वे का काम
चित्रकूट से प्रयागराज होते हुए वाराणसी तक प्रस्तावित 294 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण का सर्वे सावन माह में शुरू होगा। इस परियोजना के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने भोपाल की कंसल्टेंट कंपनी नित्या नायारा का चयन किया है। अगस्त के पहले सप्ताह से एजेंसी चित्रकूट से सर्वे का कार्य शुरू करेगी।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को दो हिस्सों में बांटा गया है। चित्रकूट से प्रयागराज तक सर्वे और भूमि अधिग्रहण की जिम्मेदारी एनएचएआई को सौंपी गई है, जबकि प्रयागराज से वाराणसी तक का कार्य सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय कराएगा। एनएचएआई के प्रयागराज डिप्टी मैनेजर प्रखर सिंह के अनुसार, भूमि अधिग्रहण और एलाइनमेंट का कार्य करीब चार महीने तक चलेगा।

सर्वे के दौरान प्रयागराज की सदर तहसील, कौशाम्बी की मंझनपुर तहसील और चित्रकूट तक प्रस्तावित मार्ग का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसमें यह तय किया जाएगा कि फोरलेन कॉरिडोर के निर्माण के लिए कितनी भूमि की आवश्यकता होगी। सर्वे पूरा होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर एनएचएआई मुख्यालय को मंजूरी के लिए भेजी जाएगी। परियोजना के पूरा होने से चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा और यात्रा अधिक तेज व सुगम बनने की उम्मीद है।

 

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