आर्थिक समीक्षा
प्रदेश में अब नहीं सोता कोई भूखा, अंत्योदय श्रेणी के 40.85 लाख परिवार लाभान्वित
78,510 उचित दर दुकानें संचालित, 22.9% दुकानें महिलाओं को आवंटित
'मॉडल फेयर प्राईस शॉप' की बहुद्देशीय पहल के अंतर्गत 7481 अन्नपूर्णा भवन निर्मित
लखनऊ
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा विधानमंडल में प्रस्तुत पहली आर्थिक समीक्षा के अनुसार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत प्रदेश सरकार, गरीब एवं पात्र परिवारों को निःशुल्क और रियायती दरों पर खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिये प्रतिबद्ध है। इस हेतु पात्र परिवारों का चयन कर राशन कार्ड जारी किये गये हैं, जिनको डिजिटल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है। प्रदेश में दिसंबर, 2025 तक कुल 78,510 उचित दर दुकानें संचालित है, जिनमें ग्रामीण क्षेत्र की 67,114 तथा नगरीय क्षेत्र की 11,396 दुकाने हैं। इसमें 22.9% दुकानें महिलाओं को आवंटित हैं। राज्य में दिसंबर, 2025 तक जारी कुल 362.35 लाख राशनकार्ड्स में अंत्योदय श्रेणी के 40.85 लाख (11.27%) परिवार एवं पात्र गृहस्थी श्रेणी के 321.50 लाख (88 73%) परिवार हैं, जो उक्त अधिनियम के अन्तर्गत आच्छादित हैं।
वन नेशन वन राशनकार्ड बना संबल
वर्ष 2020-21 से प्रारम्भ वन नेशन बन राशनकार्ड' योजनान्तर्गत अन्तर्राज्यीय पोर्टेबिलिटी (उत्तर प्रदेश के लाभार्थियों द्वारा अन्य राज्यों में प्राप्त किया) की सुविधा से वर्ष 2024-25 में 38.12 लाख राशनकार्ड धारक लाभान्वित हुए, जो योजना प्रारंभ के अग्रिम वर्ष 2021-22 में लाभान्वित 8.88 लाख के सापेक्ष (03 वर्षों में) कई गुना वृद्धि है। वर्ष 2025-26 के अंतर्गत दिसंबर, 2025 तक 28.03 लाख लाभान्वित हुए हैं।
'मॉडल फेयर प्राईस शॉप' के तहत 7481 अन्नपूर्णा भवन
'मॉडल फेयर प्राईस शॉप' की बहुद्देशीय पहल के अंतर्गत 31 जनवरी, 2026 तक कुल 7481 अन्नपूर्णा भवन निर्मित कराये गये हैं, जिनमें राशन वितरण के साथ सी एस सी सेवाएं भी संचालित की जा रही हैं। सी. पी. आई आधारित मुद्रास्फीति की दर कोविड के बाद लगातार गिरावट के साथ वर्ष 2025-26 में माह अक्टूबर, 2025 तक (-)1.71 हो गयी, जिसके फलस्वरूप महगाई नियंत्रित हुयी, क्रय शक्ति बढ़ी तथा मांग आधारित अर्थव्यवस्था में सुधार परिलक्षित हुआ। अद्यतन प्रकाशित बहुआयामी गरीबी (हेडकाउंट रेशियो आकलन) वर्ष 2013-14 में 42.59% थी. जो वर्ष 2022-23 में तेजी से घटते हुए 17.40% रह गयी, इस अवधि में प्रदेश के सर्वाधिक 5.94 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आये।

