चंडीगढ़ में ईडी का बड़ा एक्शन, कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी का सचिव गिरफ्तार

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चंडीगढ़.

कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी के सचिव अजय सहगल को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट(ईडी) ने गिरफ्तार कर लिया है। ईडी की जांच अब सिर्फ एक बिल्डर या प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं रही बल्कि गमाड़ा , टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग और रियल एस्टेट मंजूरी प्रक्रिया के पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ईडी ने शुक्रवार शाम अजय सहगल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया। एजेंसी का आरोप है कि किसानों और जमीन मालिकों के फर्जी सहमति पत्र तैयार कर करीब 30.5 एकड़ जमीन का सीएलयू हासिल किया गया। जांच में सामने आया है कि 15 जमीन मालिकों के नाम पर नकली हस्ताक्षर और अंगूठे लगाए गए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सनटेक सिटी जैसे बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली और बाद में करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा होने के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने आंखें कैसे मूंदे रखीं। एजेंसी को शक है कि मंजूरियों के दौरान कई स्तरों पर मिलीभगत हुई और कुछ अधिकारियों ने कथित तौर पर अवैध लाभ लेकर नियमों को नजरअंदाज किया। इसी कारण अब गमाड़ा और टाउन प्लानिंग विभाग के कुछ अफसर भी एजेंसी के रडार पर आ गए हैं।

इस पूरे मामले की शुरुआत पंजाब पुलिस में दर्ज एफआईआर से हुई थी। किसानों ने शिकायत दी थी कि उनकी जानकारी के बिना उनकी जमीनों के सहमति पत्र तैयार किए गए और बाद में उन्हीं दस्तावेजों के जरिए प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई। मामला सामने आने के बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच शुरू की। 7 मई को ईडी ने इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी और एबीएस टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े आठ ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान एक परिसर की बालकनी से 21 लाख रुपये नकद नीचे सड़क पर फेंक दिए गए थे। नीचे लगी नेट से टकराकर नोट सड़क पर बिखर गए। बाद में ईडी अधिकारियों ने पूरी रकम कब्जे में ले ली। इस घटना ने जांच को और चर्चित बना दिया।

जांच एजेंसी के अनुसार अजय सहगल ने विवादित सीएलयू के आधार पर केवल सनटेक सिटी ही नहीं, बल्कि ‘ला कैनेला’ नामक मल्टीस्टोरी रिहायशी प्रोजेक्ट और ‘डिस्ट्रिक्ट-7’ कमर्शियल कॉम्प्लेक्स भी विकसित किए। जांच में यह भी सामने आया है कि कई यूनिटों की बिक्री रेरा से मंजूरी और पंजीकरण मिलने से पहले ही शुरू कर दी गई थी, जो नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। ईडी को यह भी जानकारी मिली है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित प्लॉट अब तक जीएमाडा को ट्रांसफर नहीं किए गए। वहीं पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जिन अनियमितताओं का उल्लेख हुआ था, उसके बावजूद केवल आंशिक सीएलयू रद्द किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

एजेंसी यह जांच रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में परियोजना के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बजाय सीमित कार्रवाई की गई। सूत्रों का कहना है कि जांच में कुछ ऐसे वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं, जिनसे संकेत मिल रहे हैं कि कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों तक लाभ पहुंचाया गया। ईडी अब बैंक खातों, प्रॉपर्टी निवेश और मंजूरी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। आने वाले दिनों में कई और लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। मामले ने पंजाब के रियल एस्टेट सेक्टर में भी हलचल पैदा कर दी है। बिल्डर लॉबी में इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि अगर जांच और गहराई तक गई तो कई पुराने प्रोजेक्ट और मंजूरियां भी जांच के दायरे में आ सकती हैं।

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