पेट्रोल-डीजल फिर महंगा: एक हफ्ते में दूसरी बार बढ़े दाम, आम आदमी पर बढ़ा बोझ

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लखनऊ

पश्चिम एशिया संकट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने फिर पेट्रोल, डीजल की कीमतों में इजाफा किया है। मंगलवार के बाद अब एक बार फिर आज पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी हुई है। पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दामों में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है।

एक सप्ताह में कीमतों में लगातार दूसरी वृद्धि के बाद राजधानी लखनऊ में पेट्रोल की कीमत 99.31 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 92.70 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इससे पहले मंगलवार को पेट्रोल और डीजल के दाम में 87 पैसे और 91 पैसे प्रति लीटर का ही इजाफा किया गया था। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा था कि तेल कंपनियों को रोज 750 करोड़ रुपये नुकसान हो रहा है।

यूपी के शहरों में पेट्रोल-डीजल के रेट
एचपीसीएल (HPCL) की साइट पर दिख रहे दामों के मुताबिक, लखनऊ में शनिवार को पेट्रोल 99.31 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.70 रुपये प्रति लीटर है। वाराणसी में पेट्रोल 99.62 और डीजल 93 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है तो आगरा में पेट्रोल 99.05 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.40 रुपये प्रति लीटर है। इसके अलावा, मेरठ में पेट्रोल 99.15 रुपये और डीजल 92.53 रुपये प्रति लीटर है।

कानपुर में सोमवार को पेट्रोल 99.33 रुपये और डीजल 92.70 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। वहीं, गोरखपुर में पेट्रोल प्रति लीटर 99.49 रुपये और डीजल प्रति लीटर 92.86 रुपये है। इनके अलावा बरेली में पेट्रोल 98.95 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.34 रुपये प्रति लीटर है। प्रयागराज में पेट्रोल 99.22 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.62 रुपये प्रति लीटर है।

दोपहिया वाहन चालकों पर सालाना बोझ
तेल एवं गैस विपणन कंपनियों ने एक सप्ताह में दूसरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया है। शनिवार को पेट्रोल के दाम में 87 पैसे और डीजल के दाम में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इसका आम आदमी की जेब पर तगड़ा असर पड़ेगा। हाल ही में आज से पहले भी दो बार बढ़ी दरों को जोड़ें तो कुल पांच रुपये के करीब कीमत बढ़ गई है। ऐसे में सालाना अतिरिक्त खर्च का बोझ दो पहिया सवार पर बढ़ेगा। ऑटो एक्सपर्ट बता रहे हैं औसत रूप से एक बाइक या स्कूटर में एक माह के दौरान 30 लीटर पेट्रोल की खपत रहती है। इसी तरह चार पहिया वाहनों में एक माह में 80 से 100 लीटर तक की खपत होती है। चार पहिया वाहन चालकों की जेब पर तीन बार हुई बढ़ोतरी से सालाना बोझ बढ़ जाएगा।

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