DMF घोटाले में Anil Tuteja को बड़ा झटका, जमानत याचिका खारिज; सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका

Editor
5 Min Read
DMF घोटाले में Anil Tuteja को बड़ा झटका, जमानत याचिका खारिज; सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

बिलासपुर.

हाईकोर्ट ने कोरबा जिले के डिस्टि्रक्ट मिनरल फंड से जुड़े फंड के इस्तेमाल में भ्रष्टाचार के संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा की तुरंत जमानत दिए जाने पेश आवेदन को खारिज कर दिया, कोर्ट ने कहा कि जुर्म की गंभीरता, आवेदक की भूमिका और गवाहों को प्रभावित करने में आवेदक की स्थिति पर गौर किया गया, क्योंकि वह डिपार्टमेंट में सीनियर ऑफिसर था और सप्लायर्स के साथ मिलकर बहुत सारा पब्लिक फंड हड़पा है.

आर्थिक अपराध जानबूझकर और सोच-समझकर किया जाता है, जिसमें निजी फ़ायदे को ध्यान में रखा जाता है, चाहे समुदाय पर इसका कोई भी नतीजा हो, जिससे समुदाय का भरोसा और आस्था खत्म हो जाती है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय हित को नुकसान होता है. मामले की सुनवाई जस्टिस नरेन्द्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच में हुई. ईओडब्ल्यू एवं एसीबी ने कोरबा जिले में डीएमएफ फंड घोटाला मामले में तत्कालीन इंडस्ट्रीयल डिपोर्टमेंट के एडिशनल सिक्रेटरी अनिल टुटेजा को 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल दाखिल किया है. जेल में बंद अधिकारी ने हाईकोर्ट में स्थाई जमानत दिए जाने आवेदन दिया था. आवेदन में सह आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत दिए जाने, मामले की सुनवाई में विलंब के आधार पर जमानत की मांग की गई थी. आवेदन पर जस्टिस नरेन्द्र कुमार व्यास की कोर्ट में सुनवाई हुई.

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश में कहा करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 7 और 12 के तहत अपराध करने में आवेदक की संलिप्तता साबित करते हैं. केस डायरी को और देखने पर, यह साफ़ पता चलता है कि सतपाल सिह छाबड़ा को उन फर्मों से गैर-कानूनी कमीशन के तौर पर 16 करोड़ रुपये मिले हैं. इसमें से आवेदक को पेमेंट किया गया है, इसलिए पहली नज़र में, आवेदक के इस अपराध में शामिल होने से इनकार नहीं किया जा सकता. आवेदक ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करके प्राइवेट कंपनियों द्बारा पब्लिक फंड का गलत इस्तेमाल किया है, जिससे पब्लिक के हित को बहुत नुकसान हुआ है. सतपाल सिह छाबड़ा के 18.02.2025 को पुलिस के सामने दिए गए बयान में लगाए गए आरोपों के बारे में सच्चाई सामने लाने के लिए, आवेदक की कस्टडी ज़रूरी है. आवेदक का यह भी कहना है कि दूसरे सह-आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई है, इसलिए, मौजूदा आवेदक को पैरिटी बेसिस पर ज़मानत दी जा सकती है. इस पर कहा कि केस के रिकॉर्ड से पता चलता है कि आरोपी दीपेश टांक 8 महीने से एक साल से ज़्यादा जेल में रहा, इसी तरह रानू साहू और सौम्या चौरसिया 2 साल से ज़्यादा जेल में रहे, जबकि आवेदक 23.02.2026 से यानी सिर्फ़ दो महीने जेल में रहा, इसलिए आवेदक इन आरोपियों के साथ पैरिटी का दावा नहीं कर सकता है.

आवेदक का यह भी कहना है कि ट्रायल में ज़्यादा समय लग सकता है क्योंकि प्रॉसिक्यूशन को कई गवाहों से पूछताछ करनी है और चार्जशीट के साथ बहुत सारे डॉक्यूमेंट्स फाइल किए गए हैं. इस पाइंट पर कोर्ट ने कहा ट्रायल में देरी हमेशा आरोपी को बेल पर रिहा होने का कोई हक नहीं देती. कोर्ट को जुर्म की गंभीरता, एप्लीकेंट की भूमिका और गवाहों को प्रभावित करने में एप्लीकेंट की स्थिति पर गौर करना होगा, क्योंकि वह डिपार्टमेंट में सीनियर ऑफिसर था और एप्लीकेंट ने सप्लायर्स के साथ मिलकर बहुत सारा पब्लिक फंड हड़पा है. एप्लीकेंट पहले भी एक असरदार पद पर था, इस बात की बहुत ज़्यादा संभावना है कि अगर उसे इस कोर्ट ने बेल पर रिहा किया तो वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है, गवाहों को प्रभावित कर सकता है और जांच में रुकावट डाल सकता है. इसके साथ कोर्ट ने आरोपी की जमानत आवेदन को खारिज किया है.

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *