लंबरदार बनने के लिए शिक्षा जरूरी! पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को दिए निर्देश

Editor
3 Min Read
लंबरदार बनने के लिए शिक्षा जरूरी! पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को दिए निर्देश
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

चंडीगढ़.

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब में गांवों के लंबरदारों की नियुक्ति को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार से इस पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने पर विचार करने को कहा है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा नियमों में शैक्षणिक योग्यता निर्धारित न होने के कारण केवल कम पढ़ा-लिखा होना किसी उम्मीदवार को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हर्ष बांगर की पीठ ने पटियाला जिले के एक गांव में नियुक्त सातवीं पास लंबरदार की नियुक्ति को बरकरार रखा। इस नियुक्ति को एक अधिक शिक्षित और कम उम्र के उम्मीदवार ने चुनौती दी थी।

12वीं पास था याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ता 12वीं पास था और उसका तर्क था कि चयनित उम्मीदवार न केवल कम शिक्षित है बल्कि उम्र में भी अधिक है, इसलिए उसे लंबरदार नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए था। हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि पंजाब भूमि राजस्व नियमों में लंबरदार पद के लिए किसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान नहीं है। ऐसे में केवल कम शैक्षणिक योग्यता के आधार पर चयनित उम्मीदवार को अयोग्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि लंबरदार को गांव स्तर पर प्रशासनिक कार्य, राजस्व संबंधी जिम्मेदारियां तथा सरकारी अधिकारियों के साथ समन्वय जैसे कार्य करने होते हैं। ऐसे में यह उचित होगा कि उसके पास पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी की बुनियादी समझ हो तथा कम से कम मैट्रिक स्तर तक की शिक्षा हो। पीठ ने अपने आदेश में हरियाणा का उदाहरण भी दिया, जहां लंबरदार पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता ‘मिडिल पास’ निर्धारित है। अदालत ने कहा कि पंजाब सरकार को भी वर्तमान परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को देखते हुए इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उम्र संबंधी दलील खारिज
अदालत ने उम्र संबंधी दलील को भी खारिज करते हुए कहा कि केवल अधिक उम्र होना नियुक्ति रद्द करने का आधार नहीं बन सकता। उम्र का महत्व तभी है जब उससे व्यक्ति की कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती हो। मामले में ऐसा रिकॉर्ड या शिकायत पेश नहीं की गई जिससे यह साबित हो कि चयनित लंबरदार अपने दायित्व निभाने में असमर्थ है। हाई कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित व्यक्ति पिछले करीब दस वर्षों से लंबरदार के रूप में कार्य कर रहा है और उसके कामकाज को लेकर कोई शिकायत सामने नहीं आई। इसी आधार पर अदालत ने नियुक्ति में हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए आदेश की प्रति पंजाब सरकार को भेजने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में नियमों में आवश्यक बदलाव पर विचार किया जा सके।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *