Petrol-Diesel Price Hike: फिर बढ़े ईंधन के दाम, 90 पैसे तक महंगा हुआ तेल; जानें पंजाब-चंडीगढ़ के ताजा रेट

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Petrol-Diesel Price Hike: फिर बढ़े ईंधन के दाम, 90 पैसे तक महंगा हुआ तेल; जानें पंजाब-चंडीगढ़ के ताजा रेट
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चंडीगढ़ 
ईंधन के दामों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। अब लुधियाना में पेट्रोल के नए दाम 101.98 रुपये हो गए हैं। वहीं डीजल 91.79 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं चंडीगढ़ में अब पेट्रोल का दाम 98.10 रुपये हो गया है। डीजल का भाव 86.09 रुपये प्रति लीटर हो गया है। 

तीन दिन पहले बढ़े थे भाव
तीन दिन पहले ही पेट्रोल-डीजल तीन रुपये लीटर महंगे हुए थे। जिसके बाद चंडीगढ़ में पेट्रोल के दाम 97.24 रुपये हो गए थे। वहीं डीजल 85.25 रुपये प्रति लीटर हो गया था। अब नई बढ़ोतरी से लोगों की जेब पर नया बोझ पड़ गया है।

पटियाला में पेट्रोल 101.3 रुपये और डीजल का दाम 90.80 रुपये है। अमृतसर में पेट्रोल का भाव 101.30 रुपये और डीजल का 90.80 प्रति लीटर हो गया है।  

वाहन चालकों में नाराजगी
बताया जा रहा है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और ईरान संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। वहीं, आम लोगों का कहना है कि पहले से बढ़ी महंगाई के बीच ईंधन के दाम बढ़ने से घरेलू बजट बिगड़ गया है। पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों में नाराजगी देखने को मिली।

लोगों का कहना है कि रोजमर्रा के खर्च पहले ही बढ़ चुके हैं और अब पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सफर करना भी मुश्किल होता जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर नौकरीपेशा लोगों, ऑटो चालकों और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है। शहरवासियों का कहना है कि ईंधन महंगा होने से सब्जियों, दूध और अन्य जरूरी सामान के दाम भी बढ़ेंगे।

लुधियाना में पेट्रोल की कीमत ₹101.11 से बढ़कर ₹101.98 हो गई है, यानी इसमें 85 पैसे की बढ़ोतरी हुई। वहीं डीजल के दाम ₹90.90 से बढ़कर ₹91.79 पहुंच गए, जिससे 89 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ है।

जालंधर में पेट्रोल पहले ₹100.40 का था, तो अब बढ़ाकर ₹101.41 हो गया, जबकि डीज़ल ₹90.35 से बढ़ाकर ₹91.24 हो गया हैं। वहीं पठानकोट में पेट्रोल ₹101.60 से बढ़कर ₹102.46 हो गया, जबकि डीजल ₹91.38 से बढ़कर ₹92.25 हो गया है।

चंडीगढ़ में पेट्रोल 97.27 से बढ़कर 98.12 रुपए हो गए। इसमें 85 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। डीजल के रेट 85.25 से बढ़कर 86.09 रुपए हो गए। उसमें 84 पैसे बढ़े हैं। चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित सिटको पेट्रोल पंप के मैनेजर ने बताया की हमारे यहां अदानी टोटल गैस ग्रुप की सप्लाई है। सीएनजी के रेट आज ₹94.25 से बढ़कर ₹96 हो गए हैं।

एक्सपर्ट क अनुसार, पेट्रोल-डीचल में हुई बढ़ोतरी से अब धान के सीजन में किसानों को ₹756 करोड़ ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। क्योंकि औसतन प्रति एकड़ करीब 90 लीटर डीजल खर्च होता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?
इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।

क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।

डीजल के दाम बढ़ने का किसानों पर क्या असर…
किसानों को ₹756 करोड़ ज्यादा खर्च करना पड़ेगाः पंजाब पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सचदेवा के अनुसार, पेट्रोल-डीजल के रेट एक बार फिर से बढ़ गए हैं। धान के सीजन में डीजल के रेट बढ़ने का सीधा असर किसानों पर भी दिखता है। पांच दिन में डीजल के रेट करीब 4 रुपए प्रति लीटर बढ़ गए हैं। पहले 3.11 रुपए प्रति लीटर बढ़ोत्तरी हुई और अब 89 पैसे प्रति लीटर बढ़े हैं। पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण सेल के अनुसार पंजाब में धान सीजन (4 महीने) में कुल 189 करोड़ लीटर डीजल की खपत होती है। ऐसे में पंजाब की किसानी पर 756 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। चार महीने में 189 करोड़ लीटर डीजल की खपत: पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के अुनसार, धान के चार महीने के सीजन के दौरान पंजाब में कुल 189 करोड़ लीटर डीजल की खपत का अनुमान है। पंजाब पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (PPDA) के अनुसार, धान के सीजन (जून से सितंबर) के दौरान पंजाब में डीजल की कुल बिक्री का लगभग 50% हिस्सा सीधे कृषि क्षेत्र और किसानों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है।

औसतन प्रति एकड़ करीब 90 लीटर डीजल खर्च होता: पंजाब में खेत तैयार करने (कद्दू करने) से लेकर सिंचाई और फसल कटाई तक औसतन प्रति एकड़ करीब 90 लीटर डीजल खर्च होता है। वहीं कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक राज्य में लगभग 5.5 लाख पंजीकृत ट्रैक्टर, करीब 1.2 लाख फसल अवशेष प्रबंधन (पराली संभालने वाली) मशीनें और लगभग 1.5 लाख डीजल चालित ट्यूबवेल मौजूद हैं। इन कृषि उपकरणों और मशीनों में बड़े स्तर पर डीजल की खपत होती है, इसलिए डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर किसानों की खेती लागत और कृषि खर्च पर पड़ता है।

अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं…

डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। इसे ऐसे समझिए:

मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे।

खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी।

बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

 

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