20,000 नए शिक्षक व अनुदेशक बेसिक शिक्षा के कायाकल्प को बनाएंगे और मजबूत: सीएम योगी

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20,000 नए शिक्षक व अनुदेशक बेसिक शिक्षा के कायाकल्प को बनाएंगे और मजबूत: सीएम योगी

24,717 अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने बढ़े मानदेय और स्वास्थ्य सुरक्षा सुविधा का किया शुभारम्भ

10,000 नए शिक्षकों का अधियाचन शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा गया: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए नए अनुदेशकों की नियुक्ति की जाएगी: सीएम

सीएम बोले: हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता

बेसिक शिक्षा परिषद में 96% विद्यालयों में पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं, ड्रॉपआउट दर घटी: सीएम

बच्चों को छुई-मुई न बनाएं, उन्हें मजबूत, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है: मुख्यमंत्री

लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद की कायाकल्प यात्रा को और अधिक मजबूती देने के लिए प्रदेश सरकार 20,000 नए शिक्षक और अनुदेशकों की नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में शिक्षा आयोग का गठन किया गया है, जो विभिन्न स्तरों पर शिक्षकों का चयन कर रहा है। उन्होंने कहा कि 10,000 नए शिक्षकों का अधियाचन भेजा जा चुका है, जबकि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नए अनुदेशकों की नियुक्ति भी की जाएगी, जिससे छात्र-शिक्षक अनुपात भी बेहतर होगा। मुख्यमंत्री रविवार को लोकभवन सभागार में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान समारोह एवं बढ़े हुए मानदेय के चेक वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

सरकार ने खुद मांगा मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2011-12 में बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अंशकालिक अनुदेशकों की नियुक्ति शुरू की गई थी। उस समय उन्हें 7,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता था। वर्तमान में कला शिक्षा के 8,469, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा के 9,645 तथा कार्यानुभव शिक्षा के 6,192 अनुदेशक कार्यरत हैं और कुल संख्या 24,296 रह गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2011-12 से लेकर 2022 तक इनके मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई थी। वर्ष 2019 में अनुदेशक महासंघ के साथ बैठक में उन्होंने स्वयं प्रस्ताव मांगा था, लेकिन चुनाव अधिसूचना के कारण निर्णय नहीं हो सका। वर्ष 2022 में सरकार ने 2,000 रुपये की वृद्धि की, लेकिन सरकार स्वयं भी इससे संतुष्ट नहीं थी।

सभी अनुदेशक पोर्टल पर कराएं पंजीकरण, जल्द मिलेगा स्वास्थ्य कार्ड
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का मानना है कि अनुदेशक, शिक्षामित्र और बेसिक शिक्षा से जुड़े प्रत्येक कर्मचारी का सम्मान और मानदेय गरिमापूर्ण होना चाहिए। लंबे समय से चली आ रही मांगों को स्वीकार करते हुए सरकार ने अब अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। साथ ही उन्हें और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी अनुदेशक बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा तैयार पोर्टल पर तत्काल पंजीकरण कराएं ताकि अगले सप्ताह बड़े समारोह में स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा सकें।

शिक्षा की नींव मजबूत करने वालों को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी अवश्य मिलनी चाहिए
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों, 24,296 अनुदेशकों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को सामाजिक एवं स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भारत की शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिए निरंतर योगदान दे रहा है, उसे सामाजिक सुरक्षा की गारंटी अवश्य मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बढ़ा हुआ मानदेय सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा और कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी इससे जुड़ी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2019 में अनुदेशक बहनों को छह माह का पूर्ण मानदेय सहित मातृत्व अवकाश दिया था। वर्ष 2023 में स्वेच्छा से विद्यालय परिवर्तन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, जिसके तहत 4,000 से अधिक अनुदेशकों को अपनी पसंद का विद्यालय चुनने का अवसर मिला। 

96 प्रतिशत बेसिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में जब उनकी सरकार बनी, उस समय बेसिक शिक्षा परिषद की स्थिति बेहद खराब थी। 100 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों में अनुदेशकों की सेवाएं समाप्त करने तक के प्रस्ताव आए थे, लेकिन सरकार ने उन्हें अस्वीकार करते हुए ‘स्कूल चलो अभियान’ और ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की शुरुआत की। आज परिणाम यह है कि 96 प्रतिशत बेसिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं और विद्यालयों की स्थिति में व्यापक सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि ड्रॉपआउट दर, जो पहले 17-18 प्रतिशत थी, अब घटकर लगभग 3 प्रतिशत रह गई है और सरकार का लक्ष्य इसे शून्य तक पहुंचाना है। 

बच्चों की छिपी प्रतिभा को पहचानें और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दें
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर बच्चा किसी न किसी प्रतिभा के साथ जन्म लेता है। कोई खेल में अच्छा होता है, कोई कला में, कोई विज्ञान में। शिक्षकों और अनुदेशकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की छिपी प्रतिभा को पहचानें और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दें। उन्होंने कहा कि बच्चों को दबाने की नहीं, बल्कि प्रेरित करने और सही दिशा दिखाने की जरूरत है। आत्म अनुशासन, समय पालन, स्वच्छता और संस्कार शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने मीडिया से भी अपील करते हुए कहा कि यदि बच्चे श्रमदान करते दिखाई दें तो उसे नकारात्मक रूप में प्रस्तुत न किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को छुई-मुई न बनाएं, उन्हें मजबूत, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। बेसिक शिक्षा परिषद से उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षकों को दंडित करने के बजाय सम्मानित किया जाना चाहिए जो बच्चों में अनुशासन और स्वच्छता की भावना विकसित कर रहे हैं।

समय पर उपलब्ध करा दी जाएंगी पुस्तकें
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ को नीति आयोग ने देश के सामने एक सफलता की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के सामूहिक प्रयासों से ही यह बदलाव संभव हुआ है। सरकार की साफ नीयत और स्पष्ट नीति के कारण आज प्रदेश में लगभग 1 करोड़ 60 लाख बच्चे बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बच्चों के लिए जूते-मोजे, यूनिफॉर्म, स्वेटर और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की है। अभिभावकों के बैंक खातों में सीधे धनराशि भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें समय पर उपलब्ध करा दी जाएंगी। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि बच्चे स्कूल के वातावरण से जुड़ें और पढ़ाई के साथ खेलकूद व अन्य गतिविधियों में भी भाग लें।

गरीब बेटियों की सफलता की कहानियां प्रेरणा देती हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिकों और निराश्रित बच्चों के लिए 18 अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किए गए हैं, जहां 18 हजार बच्चे एक साथ रहकर शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। इन विद्यालयों में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया गया है और भोजन एवं आवास की पूरी व्यवस्था सरकार कर रही है। इसी तर्ज पर प्रत्येक जनपद में दो-दो मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं, जहां प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक की शिक्षा, खेलकूद, स्किल डेवलपमेंट और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को पहले चरण में 8वीं से 12वीं तक अपग्रेड किया गया है। अब सभी 825 विकासखंडों में एक-एक कस्तूरबा गांधी विद्यालय स्थापित करने के लिए धनराशि उपलब्ध करा दी गई है। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों की बेटियों की सफलता की कहानियां सरकार को प्रेरणा देती हैं।

कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित रहा तो दुष्परिणाम पूरे समाज और राष्ट्र को भुगतना पड़ेगा
मुख्यमंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है, उसी प्रकार यदि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित रह जाता है तो उसका दुष्परिणाम पूरे समाज और राष्ट्र को भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है और शिक्षा क्षेत्र में हो रहे परिवर्तन भविष्य के भारत की मजबूत नींव तैयार करेंगे।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार पांडे, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, सदस्य विधान परिषद इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह, डॉक्टर लालजी प्रसाद निर्मल, विधायक डॉक्टर नीरज बोरा और अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा उपस्थित रहे।

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