लुधियाना साइबर फ्रॉड का बड़ा खुलासा, 450 म्यूल अकाउंट्स से करोड़ों का ट्रांजैक्शन; 4 मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Editor
4 Min Read
लुधियाना साइबर फ्रॉड का बड़ा खुलासा, 450 म्यूल अकाउंट्स से करोड़ों का ट्रांजैक्शन; 4 मास्टरमाइंड गिरफ्तार
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

लुधियाना
 फिरोजपुर रोड पर दो साइबर ठगी सेंटरों पर रेड करने के बाद गिरफ्तार किए गए 132 आरोपितों से पूछताछ में कई अहम राजफाश हुए हैं। विदेश से होने वाली करोड़ों की ट्रांजेक्शन जिन बैंक खातों में की जाती थी, वे म्यूल अकाउंट्स हैं।

पुलिस ने अभी तक 450 खातों को खंगाला है, जिनमें करोड़ों रुपये की ट्रांजेक्शन हुई है। अब पुलिस इन खातों की डिटेल्स को निकालने में जुटी है। वहीं, इस मामले में लुधियाना से दिल्ली और गुजरात गई पुलिस की टीमों ने चार किंगपिन गिरफ्तार किए हैं, जोकि इस ठगी के नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे थे। पुलिस उन्हें लुधियाना लाकर पूछताछ करेगी।

गौरतलब है कि 13 मई को साइबर सेल और दो थानों की टीम ने दो साइबर ठगी सेंटरों पर रेड की थी। यहां से पुलिस ने 132 आरोपितों को गिरफ्तार किया था और उनसे 1.07 करोड़ रुपये, 229 मोबाइल, 98 लैपटाप और 19 गाड़ियां बरामद की थीं। आरोपित नार्थ अमेरिका और यूरोप के लोगों को स्पैम और हैकिंग का डर दिखाकर उनके खाते खाली कर देते थे।

किराये पर लिए खातों में ट्रांसफर हुए करोड़ों
मामले की शुरुआती जांच में पुलिस को 300 खाते मिले थे, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती रही, वैसे-वैसे खातों की संख्या भी बढ़ती गई। अब इन खातों की संख्या 450 हो गई है। ये सभी खाते लोगों के आईडी प्रूफ का प्रयोग करके खुलवाए गए हैं। इसके बदले में खाता देने वाले लोगों को पांच से 10 हजार रुपये किराये के तौर पर हर माह दिए जाते हैं।

पैसा घुमाने और ठगी के पैसे को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। ये खाते पंजाब, दिल्ली, गुजरात, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के नाम से खुले हुए हैं। अब पुलिस इन खातों की डिटेल को खंगालने में जुटी है, क्योंकि इन खातों में ही चार से पांच करोड़ रुपये की ट्रांजेक्शन हो चुकी है। पुलिस अब इन खाता धारकों की भी पड़ताल कर रही है।

आईटी कंपनी का हवाला देकर लेते थे ऑफिस स्पेस
आरोपित जहां भी ऑफिस लेते थे, वहां ये कहा जाता था कि उन्होंने आईटी कंपनी का ऑफिस खोलना है, जोकि रात में ज्यादा काम करते हैं, क्योंकि उनकी डीलिंग विदेशी लोगों से होती है। इसलिए उनका ऑफिस 24 घंटे खुला रहता था। यहां दो से तीन शिफ्ट में काम होता था। किराया जितना उन्हें बिल्डिंग का मालिक कहता था, उससे ज्यादा ही देते थे।

म्यूल अकाउंट कैसे इस्तेमाल होते हैं?
    किसी व्यक्ति से आनलाइन फ्राड किया जाता है। जैसे फर्जी काल, यूपीआइ फ्राड, निवेश स्कैम, लोन एप, ओटीपी स्कैम आदि।

    ठगी का पैसा सीधे अपराधी के खाते में नहीं जाता बल्कि कई अलग-अलग बैंक खातों में भेजा जाता है।

    पैसा तेजी से आगे ट्रांसफर किया जाता है, ताकि पुलिस या बैंक ट्रैक न कर सकें।

    अंत में पैसा नकद निकाला जाता है, क्रिप्टो/सट्टेबाजी/हवाला आदि में भेज दिया जाता है।

क्या है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी चोरी या ठगी के पैसों को इधर-उधर ट्रांसफर करने, छिपाने या सफेद दिखाने के लिए करते हैं। खाते का मालिक कई बार जानबूझकर शामिल होता है, और कई बार उसे पता भी नहीं होता कि उसका अकाउंट अपराध में इस्तेमाल हो रहा है।

 

TAGGED: ,
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *