केरल में BJP का 13 सूत्रीय एजेंडा: लोकसभा चुनाव से पहले अल्पसंख्यक और OBC राजनीति पर फोकस

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केरल

केरल विधानसभा चुनाव में तीन सीटों पर जीत से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में आगामी लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए 13 सूत्रीय राजनीतिक एजेंडा जारी किया है. पार्टी ने इस एजेंडे में पिछड़े हिंदू समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और अल्पसंख्यक समुदायों के साथ अपने राजनीतिक समीकरण को नए सिरे से तय करने पर जोर दिया है.

यह राजनीतिक प्रस्ताव शनिवार को तिरुवनंतपुरम में हुई केरल बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक में पारित किया गया. बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री और केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने की. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 13 सूत्रीय एजेंडे में राज्य की क्रिश्चियन कम्युनिटी के बीच कोई स्पेशल आउटरीच प्रोग्राम चलाने का उल्लेख नहीं किया गया है. केरल विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने चर्च और क्रिश्चियन कम्युनिटी के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिश की थी.

सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने क्रिश्चियन कम्युनिटी से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई है, लेकिन चर्च नेतृत्व के साथ संस्थागत स्तर पर संबंध मजबूत करने की रणनीति से पीछे हट गई है. इसकी एक बड़ी वजह कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ के साथ चर्च नेतृत्व की बढ़ती राजनीतिक नजदीकी मानी जा रही है. इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 का चर्च द्वारा विरोध भी बीजेपी के लिए चुनावी अभियान में असहज स्थिति का कारण बना.

बीजेपी ने अपने नए एजेंडे में ओबीसी आरक्षण को बड़ा मुद्दा बनाया है. पार्टी का कहना है कि धर्म के आधार पर ओबीसी आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए और आरक्षण केवल ओबीसी, एससी, एसटी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक सीमित रहना चाहिए. पार्टी का आरोप है कि केरल में अल्पसंख्यक समुदाय का एक वर्ग ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ ले रहा है, जिसे समाप्त किया जाना चाहिए. राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि बीजेपी पिछड़ा वर्ग आरक्षण को धर्म आधारित आरक्षण में बदलने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगी.

उन्होंने कहा कि पार्टी की नीति 'सबके लिए न्याय, किसी का तुष्टिकरण नहीं' है. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि राज्य सरकार मुस्लिम लीग और जमात-ए-इस्लामी के दबाव में तुष्टिकरण की राजनीति करती है तो बीजेपी उसका कड़ा विरोध करेगी. बीजेपी ने अपने 13 सूत्रीय एजेंडे में सबरीमला मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया है. पार्टी ने सबरीमला गोल्ड लूट मामले में सीबीआई जांच की मांग की है और महिलाओं के प्रवेश को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी की है.

इसके अलावा मंदिरों की संपत्तियों और परिसंपत्तियों का ऑडिट कराने की मांग की गई है. पार्टी ने शिक्षा संस्थानों में निवेश बढ़ाने, बच्चों को धार्मिक कट्टरपंथी संगठनों, आतंकवादी संगठनों और नशे के प्रभाव से बचाने के लिए कदम उठाने की भी बात कही है. बीजेपी का दावा है कि केरल में अब एलडीएफ और यूडीएफ के अलावा तीसरा राजनीतिक विकल्प उभर चुका है और जनता ने उसे स्वीकार करना शुरू कर दिया है.
 
हालांकि चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, केरल में बीजेपी की सीटें बढ़ने के बावजूद उसके वोट शेयर में बड़ा उछाल नहीं आया. पार्टी को 2026 विधानसभा चुनाव में 11.42 प्रतिशत वोट मिले, जबकि 2021 में उसे 11.30 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे. पार्टी का लक्ष्य 20 प्रतिशत वोट शेयर हासिल कर राज्य की बड़ी राजनीतिक ताकत बनने का था, लेकिन वह इससे काफी पीछे रह गई. हालांकि, इस केरल विधानसभा चुनाव में बीजेपी अपने लिए सकारात्मक पक्ष भी देख रही है. राजीव चंद्रशेखर के मुताबिक राज्य की 21 सीटें ऐसी रहीं, ​जहां बीजेपी को 20 प्रतिशत से अधिक वोट मिले, वहीं 10 ऐसी सीटें भी रहीं, जहां पार्टी को 30 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले.

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