NEET-UG 2026 पेपर लीक,सीबीआई जांच में बड़े नेटवर्क का खुलासा

Editor
4 Min Read
NEET-UG 2026 पेपर लीक,सीबीआई जांच में बड़े नेटवर्क का खुलासा
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

 नई दिल्ली

 नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच में एक बड़े नेटवर्क के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसी को शक है कि इस नेटवर्क में परीक्षा से जुड़े अंदरूनी लोग, बिचौलिए और अलग-अलग राज्यों के छात्र शामिल थे।

अदालत में पेश दस्तावेजों के अनुसार, पेपर लीक कई चरणों में हुआ। जांच में सामने आया कि सवाल और उत्तर परीक्षा प्रणाली के अंदर से बाहर निकाले गए और फिर अलग-अलग लोगों तक पहुंचाए गए। सीबीआई के मुताबिक, पुणे की बॉटनी प्रोफेसर मनीषा मंडहरे परीक्षा प्रक्रिया में विषय विशेषज्ञ के तौर पर जुड़ी थीं। एजेंसी को शक है कि उन्हें बॉटनी और जूलॉजी के गोपनीय प्रश्नों तक पहुंच थी।

प्रोफेसरों और बिचौलियों की भूमिका पर शक
जांच में रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी का नाम भी सामने आया है। सीबीआई को शक है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी का कुछ हिस्सा परीक्षा तंत्र के अंदर से बाहर निकाला गया। सीबीआई के अनुसार, मनीषा मंडहरे और पुणे की ही मनीषा वाघमारे के बीच करीबी संपर्क था।

दोनों एक ही हाउसिंग सोसायटी में रहती थीं। जांच में पता चला कि वाघमारे अक्सर मंडहरे के घर जाती थीं। अदालत में सीबीआई ने कहा कि मनीषा मंडहरे, पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे आपस में साजिश के तहत काम कर रहे थे। एजेंसी के मुताबिक, लीक प्रश्नपत्र शुभम खैरनार तक पहुंचाए गए।

'स्पेशल क्लास' में बताए गए सवाल
सीबीआई ने अदालत को बताया कि अप्रैल में मनीषा मंडहरे ने पुणे स्थित अपने घर पर कुछ चुनिंदा छात्रों के लिए 'स्पेशल' क्लास ली थी। इन क्लासों में बॉटनी और जूलॉजी के सवाल छात्रों को बताए गए। बताया गया कि मनीषा वाघमारे छात्रों को इन क्लासों तक लेकर आती थीं।

जांच के अनुसार, मंडहरे छात्रों को सीधे प्रिंटेड पेपर देने की बजाय सवाल बोलकर लिखवाती थीं और नोटबुक में उन्हें समझाती थीं। जांच में आयुर्वेद चिकित्सक धनंजय लोखंडे का नाम भी सामने आया है। सीबीआई का कहना है कि उन्हें वाघमारे से परीक्षा से जुड़ी सामग्री मिली थी और वह नेटवर्क में बिचौलिए की भूमिका निभा रहे थे।

टेलीग्राम तक पहुंचा 'गेस पेपर'
सीबीआई को शक है कि शुभम खैरनार ने यह 'गेस पेपर' आरोपी यश यादव तक पहुंचाया। जांच के मुताबिक, यश यादव ने 29 अप्रैल को परीक्षा से चार दिन पहले फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के प्रश्नपत्र पीडीएफ फॉर्मेट में टेलीग्राम पर शेयर किए।

जांच में यह भी सामने आया कि मांगीलाल बीवाल ने अपने बेटे के लिए लीक पेपर लेने के बदले 10 से 12 लाख रुपये देने की बात कही थी। सूत्रों के अनुसार, यश यादव राजस्थान के सीकर में कोचिंग के दौरान मांगीलाल के बड़े बेटे विकास बीवाल को जानता था। सीबीआई का दावा है कि पेपर मिलने के बाद मांगीलाल ने उसकी प्रिंट कॉपी निकलवाई और बेटे अमन बीवाल, रिश्तेदारों और परिचितों में बांटी।

21 जून को होगी दोबारा परीक्षा
पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद कर दी गई थी। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने 12 मई को एनटीए के उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक वरुण भारद्वाज की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था।

अब नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को होगी। सीबीआई फिलहाल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, पैसों के लेनदेन और कॉल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *