बिहार बालिका साइकिल योजना में बदलाव, साइकिल पर लगेगा नया स्लोगन और मोनोग्राम

Editor
2 Min Read

पटना

 वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना शुरू की थी। इसका लक्ष्य यह था कि नौवीं कक्षा के बाद लड़कियां स्कूल नहीं छोड़ें।

ड्रापआउट को रोकने को ध्यान में रख इस योजना ने बिहार में लड़कियों के बीच नौवीं से आगे की पढ़ाई में एक बड़ा परिवर्तन लाया। गांव-गांव लड़कियां झुंड में साइकिल पर दिखने लगी।

इस योजना के बारे में नीतीश कुमार ने तब लिखा था- यह योजना मेरे दिल के करीब (क्लोज टू माइ हार्ट) है। अब सरकार इस योजना में एक प्रतीकात्मक परिवर्तन करने जा रही है।

मुख्यमंत्री साइकिल योजना के तहत साइकिल फैक्ट्री वाले जो साइकिल देंगे उसके हैंडल के आगे मोनोग्राम की शक्ल में एक प्लेट लगा होगा जिस पर लिखा होगा- 'बेटियां पढ़ें-आगे बढ़ें'।

इस स्लोगन के साथ ही मुख्यमंत्री की तस्वीर भी लगी होगी। इस बारे में सरकार ने साइकिल बनाने वाली कंपनियों से बात कर ली है।

75 प्रतिशत उपस्थिति के आधार पर मिलती है साइकिल के लिए राशि
साइकिल दिए जाने की योजना अब लड़कों के लिए भी है। इस मद में तीन हजार रुपए की राशि डीबीटी के माध्यम से विद्यार्थियों काे दी जाती है।

वर्ष 2024-25 और 2025-26 के आंकड़े के अनुसार बिहार में 1.15 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राएं साइकिल योजना के लिए पात्र हैं। हर साल आठ से दस लाख छात्राएं इस योजना से जुड़ती हैं।

साइकिल योजना का असर
मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना का असर यह हुआ है कि इसके आरंभ होने से पहले 2005 में 1.87 लाख छात्राएं मैट्रिक परीक्षा में शामिल हुई थीं। अब यह संख्या 8.7 लाख हो गयी है।

पोशाक योजना पर भी नजर
सरकार की नजर मु्ख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना पर भी है। इसके तहत कक्षा से 12 वी तक की छात्राओं को स्कूल ड्रेस के लिए राशि दी जाती है। सरकार अब यह रिपोर्ट बनवा रही है कि कहां-कहां छात्राएं ड्रेस में नहीं आ रहीं।

 

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live