भारत के पास कितने दिनों का Forex Reserve बचा, डॉलर बचाने के लिए क्या करेगी सरकार?

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नई दिल्ली

ईरान युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इस संकट से बचने के लिए सरकार कुछ इमरजेंसी कदम उठाने पर विचार कर रही है। सरकार का मुख्य लक्ष्य देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाना है। इसके लिए सोने और इलेक्ट्रॉनिक सामानों जैसी गैर-जरूरी चीजों के आयात पर रोक लगाई जा सकती है। इसके अलावा, देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ाई जा सकती हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों के बीच इस संभावित संकट को टालने के लिए कई अहम चर्चाएं हुई हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर भारत के पास कितने दिनों का विदेशी मुद्रा भंडार (डॉलर) बचा? संकट के बीच कौन से बड़े कदम उठाने की तैयारी में सरकार?

ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी
चर्चा में सबसे प्रमुख प्रस्तावों में से एक ईंधन की कीमतों में वृद्धि करना है। यदि ऐसा होता है, तो ईरान युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बढ़ोतरी होगी। हालांकि, अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गैर-जरूरी आयात पर रोक
अधिकारियों की एक बड़ी चिंता बढ़ता चालू खाता घाटा है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सरकार सोना और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे गैर-जरूरी सामानों के आयात पर प्रतिबंध या सख्ती लगाने पर विचार कर रही है। यदि स्थिति नहीं सुधरती है, तो अधिकारी गैर-जरूरी कार्यों, जैसे विदेश यात्रा के लिए विदेशी मुद्रा निकालने पर भी अस्थायी रूप से रोक लगा सकते हैं।

भारत पर ईरान युद्ध और तेल संकट का सीधा असर
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई रुकने और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से भारत को भारी नुकसान हो रहा है।

रुपये पर दबाव
महंगे कच्चे तेल को खरीदने के लिए भारत को भारी मात्रा में डॉलर (विदेशी मुद्रा) चुकाना पड़ रहा है। इस कारण भारतीय रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इस साल अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 5.6% टूट चुका है, जो इसे प्रमुख एशियाई मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बनाता है।

भारत के पास कितना विदेशी मुद्रा भंडार बचा? RBI के आक्रामक कदम
रुपये को लगातार गिरने से रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कई अहम कदम उठा रहा है।

विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति: 1 मई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 690.7 बिलियन डॉलर रह गया है, जो एक महीने से अधिक समय में सबसे निचला स्तर है। हालांकि, यह भंडार अभी भी 10 से 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है।

सट्टेबाजी पर लगाम: RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी रोकने के लिए बैंकों की दैनिक सीमा को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया है।

भविष्य के नियम: RBI आयातकों के लिए 'करेंसी हेजिंग' के नियम बदल सकता है और निर्यातकों को निर्देश दे सकता है कि उन्हें विदेशी व्यापार से मिलने वाले डॉलर वे तुरंत देश वापस लाएं।

प्रधानमंत्री की जनता से अपील

रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से इस संकट की घड़ी में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिए कि:

    ईंधन बचाने के लिए लोग सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें और 'वर्क फ्रॉम होम' करें।
    लोग सोना खरीदना बंद करें (क्योंकि सोना भारत के सबसे बड़े आयातों में से एक है)।
    गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचें।

विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम की यह चेतावनी भविष्य में किसी भी संभावित कमी से निपटने की तैयारी का हिस्सा है। वियतनाम और थाइलैंड जैसे अन्य एशियाई देशों ने भी डॉलर और ईंधन बचाने के लिए ऐसे ही 'वर्क फ्रॉम होम' के निर्देश दिए हैं।

सख्त फैसले लेने की मजबूत राजनीतिक स्थिति
हाल ही में पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी और उनके सहयोगी दल अब भारत के दो-तिहाई राज्यों को नियंत्रित करते हैं। इस मजबूत राजनीतिक स्थिति के कारण सरकार के लिए देश हित में इस तरह के सख्त आर्थिक फैसले लेना आसान हो गया है।

संक्षेप में कहें तो ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल महंगा हो गया है, जिससे भारत का खजाना (विदेशी मुद्रा) तेजी से खाली हो रहा है और रुपया कमजोर पड़ रहा है। इससे बचने के लिए सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने, सोना व इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात रोकने और जनता से ईंधन व डॉलर बचाने की अपील करने जैसे आपातकालीन उपाय कर रही है।

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