गोरखपुर में नया गोरखपुर और वैदिक सिटी परियोजनाओं को मिली रफ्तार, विकास योजनाओं की हुई समीक्षा

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लखनऊ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहजनपद गोरखपुर में विकास की तमाम योजनाएं परवान चढ़ रही हैं। इसी बीच नया गोरखपुर और वैदिक सिटी बसाने की योजनाएं भी अब जोर पकड़ने लगी हैं। इन योजनाओं के मूर्त रूप लेने पर बड़ी संख्या में लोगों के शानदार लाइफ स्टाइल के साथ स्वस्थ, साफ-सुथरा और सुखी जीवन जीने के सपने पूरे हो सकेंगे। गुरुकुल सिटी, वैदिक सिटी और ताल रिंग रोड जैसी प्रमुख परियोजनाओं को लेकर सोमवार को भूमि अर्जन विभाग की गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों और भू-स्वामियों से संवाद स्थापित कर अधिकतम भूमि आपसी सहमति से खरीदने पर जोर दें।

बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और भूमि अधिग्रहण की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। बताया गया कि नया गोरखपुर में 6000 एकड़ भूमि के अधिग्रहण का लक्ष्य है। 25 गांव में इसके लिए जमीन अधिग्रहित होनी है। प्राधिकरण उपाध्यक्ष को बैठक में बताया गया कि नया गोरखपुर के तहत गुरुकुल सिटी परियोजना मानीराम, रहमतनगर, बलापार और बैजनाथपुर गांव में विकसित हो रही। यहां मानीराम में 66.92 हेक्टेयर में से 40.80 हेक्टेयर, बलापार में 68.70 हेक्टेयर में से 40.56 हेक्टेयर और रहमतनगर में 17.44 हेक्टेयर में से 9.59 हेक्टेयर भूमि खरीदी जा चुकी है। वहीं बैजनाथपुर में 176.75 हेक्टेयर में से अभी केवल 2.15 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण हो सका है। बैठक में इन योजनाओं को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

दूसरी ओर करीब 251.89 हेक्टेयर में कोनी, माड़ापार और तकिया-मेदिनीपुर गांव में वैदिक अवधारणा पर वैदिक सिटी विकसित की जाएगी। यहां नक्षत्र वाटिका, वैदिक ज्ञान केंद्र, स्थानीय हस्तशिल्प जोन और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित की जाएगी। कुसम्ही, रुद्रपुर, भैंसहा, अराजी मतौनी और अराजी बसदीला गांवों में भी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। बैठक में इन सब योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। जीडीए उपाध्यक्ष ने एक-एक योजना के बारे में जानकारी ली और आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

ताल रिंग रोड परियोजना की भी हुई समीक्षा
इसके अलावा बैठक में ताल रिंग रोड परियोजना की भी समीक्षा की गई। प्राधिकरण उपाध्यक्ष को बताया गया कि महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर-1 में 2.66 हेक्टेयर भूमि की जरूरत है, जिसमें अब तक 0.20 हेक्टेयर भूमि ही खरीदी जा सकी है। बैठक में भूमि अधिग्रहण विभाग की कार्यप्रणाली, राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों की जिम्मेदारियों, आपसी सहमति से भूमि खरीद की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। इस संबंध में गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

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