जामिया में 20 साल से छात्रसंघ चुनाव क्यों बंद? 2006 में भंग हुआ था संगठन, अब फिर तेज हुई बहाली की मांग

Editor
3 Min Read

दक्षिणी दिल्ली
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में आखिरी बार वर्ष 2006 में छात्रसंघ चुनाव हुए थे। उस दौरान संस्थान और छात्रों के बीच लगातार बढ़ते गतिरोध और हिंसक घटनाओं के बाद जामिया के छात्रसंघ को पूरी तरह भंग कर दिया गया था।

इसके बाद वर्ष 2012 में एक बार फिर छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग उठी। इस मामले में छात्र हमीदुर्रहमान ने हाई कोर्ट का रुख किया था। छात्रों का कहना है कि उस समय संस्थान ने अदालत में चुनाव कराने के लिए परिस्थितियों को अनुकूल नहीं बताया था।

कोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला
वर्ष 2017 में भी चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन और हड़ताल हुई थी। छात्रों के मुताबिक, तब जामिया ने कोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला दिया था।

छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग
छात्रों का दावा है कि वर्ष 2022 में अदालत में मामला सुलझने के बाद भी चुनाव बहाल करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद से छात्र लगातार छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।

कैंपस के छात्रों का कहना है कि वर्तमान में लागू 'विषय प्रतिनिधियों' की व्यवस्था संस्थान की सामूहिक समस्याओं को उठाने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।

छात्रों के मुताबिक, विषय संघों के अध्यक्ष विभागाध्यक्ष होते हैं, ऐसे में छात्रावास में खाने की गुणवत्ता से लेकर अधिक शुल्क वसूले जाने जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने के लिए 20 वर्षों से छात्रसंघ चुनाव बहाल होने का इंतजार है।

कब-कब विवादों के चलते सुर्खियों में रहा जामिया
    अप्रैल 2026 : परिसर में आरएसएस द्वारा आयोजित 'युवा कुंभ' कार्यक्रम का विभिन्न छात्र संगठनों ने विरोध किया, इस दौरान छात्रों और सुरक्षा गार्डों के बीच हिंसक झड़प हुई।
    दिसंबर 2025 : सोशल वर्क विभाग की परीक्षा में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार से जुड़े सवाल पर विवाद हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने प्रोफेसर वीरेंद्र बालाजी सहारे को निलंबित कर दिया।
    दिसंबर 2019 : नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के दौरान पुलिस-छात्रों के बीच झड़प में आंसू गैस छोड़े जाने से देशव्यापी विवाद हुआ।
    फरवरी 2011 : जामिया को अल्पसंख्यक संस्थान घोषित किए जाने के बाद विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने विरोध किया।
    मार्च 2006 : जामिया प्रशासन और छात्रों के बीच लगातार बढ़ते गतिरोध तथा हिंसक घटनाओं के बाद जामिया के छात्रसंघ को पूरी तरह भंग कर दिया गया था।
    वर्ष 1992 : तत्कालीन प्रोफेसर मुशीरुल हसन द्वारा सलमान रुश्दी की किताब पर लगे बैन का विरोध करने पर कट्टरपंथी संगठनों और छात्रों ने उग्र प्रदर्शन कर उनके इस्तीफे की मांग की थी।

 

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live