प्रदेश ने चीतों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराकर बनाया परिवार का हिस्सा : मुख्यमंत्री डॉ.यादव

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श्योपुर 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की धरती ने चीतों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराकर , उन्हें पुनर्स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर अपने परिवार का हिस्सा बनाया है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने लगभग साढ़े तीन वर्ष पहले कूनो में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। आज देश में चीता पुनर्स्थापना का यह प्रोजेक्ट सफलता के साथ में आयामों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।  इस महत्वपूर्ण कार्य में मध्यप्रदेश नित नए कीर्तिमान रच रहा है। यह बात उन्होंने श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में 2 मादा चीतों को खुले जंगल में विमुक्त करते हुए कही।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो नदी के किनारे स्थित चीता रिलीज साइट पर सीसीवी -2, सीसीवी -3 चीतों को खुले जंगल में छोड़ा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश धर्म, निवेश एवं जैव विविधता के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। 
नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना से लाए गए चीतों के पुनर्स्थापन को निरंतर सफलता मिल रही हैं और आज प्रदेश ने देशभर में चीता स्टेट के रूप में पहचान बनाई है। वर्तमान में चीतों की संख्या 57 है, जिनमें से 54 कूनो नेशनल पार्क में और 03 गांधी सागर अभ्यारण्य में है। इस अवसर पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, मध्यप्रदेश वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामनिवास रावत, सहरिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष श्रीमती गुड्डी बाई आदिवासी,   श्री शशांक भूषण,  श्री राघवेन्द्र जाट,  श्री सुमित सिंघल, श्री शुभम मुदगल, श्री बाबू सिंह यादव, श्री कौशल गोयल आदि जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।  इसके साथ ही पीसीसीएफ श्रीमती समिता राजौरा , डीआईजी श्री संजय कुमार जैन,  कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक श्री सुधीर कुमार अग्रवाल, डीएफओ कुनो श्री आर थिरूकुराल, सामान्य श्री केएस रंधा, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती सौम्या आनंद, एडीएम श्री रूपेश उपाध्याय, एडिशनल एसपी श्री प्रवीण भूरिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। 

प्रदेश में 14 हजार से ज्यादा गिद्ध मौजूद 
वहीं, गिद्ध संरक्षण में भी मध्यप्रदेश देश में अग्रणी बनकर उभरा है। राज्य में 14 हजार से ज्यादा गिद्ध मौजूद हैं। भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। हाल ही में मुक्त किया गया एक गिद्ध उज्बेकिस्तान तक पहुंचा, जिसे संरक्षण अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। कुनो नेशनल पार्क अब केवल चीता परियोजना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां चीतों की संख्या बढ़कर 57 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा गांधी सागर और नौरादेही को भी चीता लैंडस्केप के रूप में विकसित किया जा रहा है।

हाथी संरक्षण के लिए 47 करोड़ की योजना मंजूर 
सरकार ने नए अभ्यारण्यों और संरक्षण क्षेत्रों पर भी फोकस बढ़ाया है। सागर जिले में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर वाइल्डलाइफ सेंचुरी घोषित की गई, जबकि ओंकारेश्वर और जहानगढ़ में नए अभ्यारण्य बनाए जा रहे हैं। ताप्ती क्षेत्र को प्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया है। इसके साथ ही घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुए, हाथी और जंगली भैंसों के संरक्षण के लिए भी विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। सरकार ने हाथी संरक्षण के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की योजना मंजूर की है। वहीं, कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच को जोड़ने वाली मेगा टाइगर कॉरिडोर परियोजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। वन्यजीव संरक्षण के इन प्रयासों से पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश अब संरक्षण, विकास और स्थानीय भागीदारी को साथ लेकर आगे बढ़ने वाला देश का प्रमुख राज्य बनता जा रहा है।
  

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