हरियाणा में 2029 चुनाव की तैयारी में जुटी BJP, स्मृति इरानी ने संभाली संगठन मजबूत करने की कमान

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 पंचकूला
 हरियाणा में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने वाली भाजपा ने वर्ष 2029 में विधानसभा चुनाव की तैयारियों की दिशा में संगठन को कसने की कवायद शुरू कर दी है।

प्रदेश की नई प्रभारी स्मृति इरानी वीरवार और शुक्रवार को पंचकूला स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय 'पंचकमल' में सरकार और संगठन के नेताओं के साथ बैठकों के जरिए पार्टी की राजनीतिक स्थिति, संगठनात्मक गतिविधियों और भावी रणनीति पर मंथन करेंगी।

प्रभारी बनने के बाद उनका यह पहला औपचारिक संगठनात्मक दौरा है। पंचकूला पहुंचने पर प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. अर्चना गुप्ता सहित प्रदेश कार्यकारणी के सदस्यों एवं पदाधिकारियों ने स्मृति इरानी का स्वागत किया।

दो दिनों में प्रदेश पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों, जिला प्रभारियों, पूर्व जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के साथ अलग-अलग बैठकें लेंगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. अर्चना गुप्ता और संगठन महामंत्री पवन राणा समेत पार्टी के प्रमुख नेता इन बैठकों में शामिल होंगे।

23 अक्टूबर को होने वाली भाजपा कोर ग्रुप की बैठक को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इन बैठकों में होने वाले फैसलों और स्मृति इरानी के संदेश की वास्तविक तस्वीर बैठकें पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

आगामी विधानसभा की अभी से तैयारी
वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 90 में से 48 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस को 37 सीटें मिली थीं। इसके बावजूद भाजपा को 42 विधानसभा क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा।

इन सीटों पर पार्टी की कमजोरियों को समझना और वहां संगठन को मजबूत करना आगामी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है। पार्टी पहले भी हारी हुई विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने और वहां विकास कार्यों व जनसमस्याओं पर ध्यान देने की रणनीति पर काम कर चुकी है।

ऐसे में स्मृति इरानी के सामने यह देखने की चुनौती होगी कि इन क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति कितनी सुधरी है, स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रियता कैसी है और जनता के बीच सरकार तथा संगठन की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए किन कदमों की जरूरत है।

संगठन की जमीनी स्थिति का होगा आकलन
प्रदेश पदाधिकारियों और जिला स्तर के नेताओं के साथ संवाद के जरिए संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन किया जा सकता है। पूर्व विधायकों और पूर्व प्रदेश पदाधिकारियों के साथ प्रस्तावित बैठकों में पुराने अनुभवों, क्षेत्रीय चुनौतियों और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर चर्चा की गुंजाइश है।

बोर्ड-निगमों के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के साथ संवाद भी सरकार तथा संगठन के बीच समन्वय के लिहाज से अहम रहेगा। दूसरे दिन कोर ग्रुप की बैठक के बाद मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, प्रदेश सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के साथ विचार-विमर्श प्रस्तावित है।

इन बैठकों में सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने, संगठन के कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।

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