तवा नदी सूखी, रेत में उगी झाड़ियां; डैम के गेट नहीं खुलने से खेती पर संकट

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नर्मदापुरम

कम बारिश के कारण इस बार तवा डेम फुल टैंक लेवल से 4 फीट खाली रह गया। इस पूरे सीजन में डेम का एक भी गेट नहीं खोला जा सका, जिससे तवा नदी में पानी का बहाव थम गया और जलस्तर नहीं बढ़ पाया।

पानी न बहने की वजह से नदी के पाट (रेत) में बड़े पैमाने पर घास और झाड़ियां उग आई हैं। इसका सीधा असर बांद्राभान के रेत में डंगरबाड़ी (सब्जी की खेती) करने वाले किसानों पर पड़ रहा है।

किसान मोहन पासी और जमुना पासी बताते हैं कि रेत में घनी झाड़ियां उगने के कारण अब खेती से पहले ट्रैक्टर में 2-3 बार ब्लेड लगवाकर सफाई करानी पड़ रही है।

किसानों की दोहरी मार यह है कि एक तरफ सफाई का खर्च बढ़ गया है, वहीं दूसरी तरफ सोसाइटी से डीएपी और यूरिया खाद नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में उन्हें बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत कई गुना बढ़ गई है।

1. जल स्तर में गिरावट और बांध का असर

    गेट न खुलना: नर्मदापुरम जिले में कोटे से काफी कम बारिश दर्ज की गई। इस वजह से तवा बांध केवल 87% तक ही भर पाया। सीजन में एक बार भी गेट नहीं खोले जाने से बांध के आगे नदी में पानी का बहाव पूरी तरह थम गया। 

रेतीला पाट: पानी न बहने के कारण नदी का विशाल पाट रेतीले मैदान में बदल गया है और जगह-जगह रेत में बड़ी मात्रा में घास और झाड़ियां उग आई हैं। 

2. पर्यटन और स्थानीय आजीविका पर प्रभाव

    नावों का संचालन ठप: तवा रिसॉर्ट के सामने नदी सूखने से पानी का स्तर अत्यधिक गिर गया है। किनारे पर चलने वाली बड़ी हाउस बोट्स जमीन पर आ गई हैं, जिससे पर्यटकों के लिए उनका संचालन और बुकिंग पूरी तरह बंद करनी पड़ी है। फिलहाल सैलानियों को केवल छोटी मोटर बोट से ही सफर कराया जा रहा है। 

बांद्राभान संगम पर अनोखा दृश्य: नर्मदापुरम के पास बांद्राभान में जहां तवा और नर्मदा नदी का प्रसिद्ध संगम होता है, वहां इस बार बिल्कुल विपरीत नजारा है। एक तरफ जीवनदायिनी नर्मदा नदी जल से पूरी तरह लबालब है, वहीं दूसरी तरफ तवा नदी का हिस्सा बेहद शांत और सूखा पड़ा है। 

3. कृषि और पर्यावरण के लिए चुनौती

    महंगी खेती: नदी सूखी होने और भूजल स्तर नीचे जाने के कारण आसपास के इलाकों में किसानों के लिए सिंचाई करना बेहद महंगा और मुश्किल होता जा रहा है। 

फसलों पर संकट: रबी सीजन की मुख्य फसलों (जैसे गेहूं और चना) के लिए तो बांध का पानी अभी पर्याप्त माना जा रहा है, लेकिन गर्मियों में ली जाने वाली मूंग की फसल के लिए पानी का संकट खड़ा हो सकता है।

 

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