5 करोड़ की उधारी से खड़ा किया ₹500 करोड़ का साम्राज्य! छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाले में EOW का बड़ा खुलासा

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 रायपुर

 पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कोल लेवी घोटाले को लेकर ईओडब्ल्यू ने बताया है कि महज पांच करोड़ की उधारी से 500 करोड़ का साम्राज्य खड़ा किया गया। ईओडब्ल्यू द्वारा अदालत में पेश किए गए पूरक आरोप पत्र से ये जानकारी सामने आई है कि किस तरह से अवैध वसूली का सिंडिकेट खड़ा किया गया।
मई-जून 2020 में भिलाई से ली गई 5 करोड़ की शुरुआती पूंजी

जांच एजेंसी के मुताबिक, मई और जून 2020 के दौरान अवैध वसूली का पूरा तंत्र और प्रशासनिक ढांचा खड़ा करने के लिए शुरुआती पूंजी की आवश्यकता थी। भिलाई के व्यापारी पप्पू बंसल से पांच करोड़ रुपये नकद लिए गए थे। इस रकम को रायपुर लाकर मुख्य आरोपित सूर्यकांत तिवारी तक पहुंचाया गया।

इसके बाद जिला स्तर पर कार्यालयों, वाहनों, कर्मचारियों और सहयोगियों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया, जिसके जरिए आगे चलकर कोयला परिवहन से करोड़ों रुपये की अवैध वसूली को अंजाम दिया गया।
सूर्यकांत तिवारी की डायरी में 477 करोड़ के लेनदेन का हिसाब

मामले में जब्त सूर्यकांत तिवारी की डायरी में दर्ज 1028 हस्तलिखित एंट्रियों में करीब 477 करोड़ रुपये के लेनदेन का हिसाब मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी ने इन प्रविष्टियों, बयानों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कथित अवैध वसूली के नेटवर्क और राजनीतिक संपर्कों की पड़ताल की है। आरोप पत्र में 15 जून 2019 को तत्कालीन खनिज सचिव और एक वरिष्ठ आइएएस अधिकारी के बीच हुई व्हाट्सएप बातचीत को शामिल किया गया है।

यह चैट कोरबा की कोल वाशरियों पर की गई गोपनीय छापेमारी से जुड़ी थी। बातचीत के दौरान एक आइएएस अधिकारी ने अंग्रेजी में लिखा था तत्कालीन मुख्यमंत्री को इसकी पूरी जानकारी है। एजेंसी ने इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की इस प्रशासनिक कार्रवाई और घटनाक्रम में संज्ञान होने से जोड़कर चार्जशीट का हिस्सा बनाया है।

ई-परमिट व्यवस्था बदलकर खोला गया अवैध वसूली का रास्ता

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन ई-परमिट व्यवस्था में सोचे-समझे तरीके से बदलाव किया गया। पहले रॉयल्टी जमा करते ही सीधे ऑनलाइन ई-परमिट जारी हो जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत संबंधित जिला खनिज अधिकारी (डीएमओ) का अनुमोदन अनिवार्य कर दिया गया। ड्राफ्ट आदेशों में हाथों से की गई काट-छांट और लिखावट को ईओडब्ल्यू ने साक्ष्य के रूप में शामिल किया है। आरोप है कि जिला स्तर पर पूर्व स्वीकृति की इस बाध्यता ने ही व्यापारियों से जबरन वसूली का रास्ता आसान बनाया।

फिलहाल मामले में निलंबित आइएएस रानू साहू, समीर विश्नोई, जयप्रकाश मौर्य, रिटायर्ड आइएएस अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया और कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, भिलाईनगर के कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय, तत्कालीन कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह, विनोद तिवारी समेत अन्य नेताओं की भूमिका अदालत में विचाराधीन है।h

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