झारखंड हाई कोर्ट ने पेंशन मामले में सख्ती दिखाई, शिक्षा विभाग को 8 हफ्ते में भुगतान का आदेश

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झारखंड हाई कोर्ट ने पेंशन मामले में सख्ती दिखाई, शिक्षा विभाग को 8 हफ्ते में भुगतान का आदेश
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रांची

 झारखंड हाई कोर्ट में गुमला जिला के बैजनाथ जालान कालेज, सिसई के तृतीय वर्गीय कर्मचारी दिनेश साहू को पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दिए जाने के मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई।

सुनवाई के बाद अदालत ने उच्च शिक्षा निदेशक की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि जब समान परिस्थितियों वाले दूसरे कर्मियों को पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ दिया जा चुका है, तो प्रार्थी को इससे वंचित रखना उचित नहीं है।

सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित उच्च शिक्षा निदेशक सुधीर बाड़ा को निर्देश दिया कि वे आठ सप्ताह के भीतर मामले की पुनः समीक्षा कर दिनेश साहू को पंचम एवं छठा वेतनमान का लाभ देते हुए पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान सुनिश्चित करें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के पहले सप्ताह में निर्धारित करते हुए अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।

उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से दाखिल शपथ पत्र में कहा गया था कि विभाग ने सकारण आदेश पारित कर प्रार्थी को एकल पीठ के आदेश के अनुरूप लाभ नहीं देने का निर्णय लिया है। इस पर हाई कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए उस सकारण आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि दिनेश साहू का मामला उपेंद्र प्रसाद एवं अन्य कर्मियों के मामले के समान है।

कोर्ट ने कहा कि प्रार्थी का समायोजन और नियमितीकरण भी उसी पत्र के आधार पर हुआ था, जिसके आधार पर उपेंद्र प्रसाद एवं अन्य कर्मियों को लाभ मिला। इसलिए दिनेश साहू को भी वही लाभ मिलना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रार्थी के मामले में सरकार ने अब तक कोई अपील दाखिल नहीं की है, जबकि उपेंद्र प्रसाद मामले में अपील समय सीमा के भीतर दाखिल नहीं होने के कारण खारिज हुई थी।

इसका हवाला देकर प्रार्थी के मामले को लंबित रखना अनुचित है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी ने अदालत को बताया कि दिनेश साहू वर्ष 2022 में बैजनाथ जालान कालेज, सिसई (गुमला) से तृतीय वर्गीय कर्मचारी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें फिलहाल प्रोविजनल रूप से पंचम वेतनमान का लाभ मिल रहा है। उनकी सेवा समायोजन और नियमितीकरण सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में वर्ष 2005 और 2007 में हुआ था।

दिनेश साहू के मामले में सरकार ने एकल पीठ के आदेश को कभी चुनौती ही नहीं दी। बता दें कि हाई कोर्ट की एकल पीठ ने वर्ष 2024 में ही दिनेश साहू को पंचम एवं छठा वेतनमान का लाभ देते हुए पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान करने का निर्देश दिया था। आदेश का पालन नहीं होने पर प्रार्थी ने अवमानना याचिका दाखिल की है।

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