पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ का विमोचन करेंगे सीएम योगी

Editor
3 Min Read

पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द की आत्मकथा 'भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष' का विमोचन करेंगे सीएम योगी

पूर्व राष्ट्रपति की गरिमामय उपस्थिति में लोक भवन सभागार में होगा रूपा पब्लिकेशंस इंडिया द्वारा प्रकाशित पुस्तक का विमोचन

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और दोनों डिप्टी सीएम भी रहेंगे मौजूद

साधारण पृष्ठभूमि से सर्वोच्च संवैधानिक पद तक के संघर्ष, अनुभव व राष्ट्रपति भवन के अनछुए पहलुओं पर आधारित है पुस्तक

लखनऊ
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार, 14 अक्टूबर को भारत के 14वें राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द की आत्मकथा 'भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष' का विमोचन करेंगे। पूर्व राष्ट्रपति की गरिमामय उपस्थिति में यह कार्यक्रम लोकभवन सभागार में आयोजित किया गया है। रूपा पब्लिकेशंस इंडिया द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक के विमोचन समारोह में विधानसभा अध्य्क्ष सतीश महाना, दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक समेत अन्य अतिथिगण उपस्थित रहेंगे।

पुस्तक में कई अनछुए पहलुओं और निर्णयों का विवरण
पूर्व राष्ट्रपति द्वारा लिखी गई पुस्तक में केवल उनके व्यक्तिगत जीवन ही नहीं, बल्कि राष्ट्रपति के रूप में 5 वर्षीय कार्यकाल के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों, संवैधानिक शक्तियों, कोविड-19 संकट, केंद्र-राज्य संबंधों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़े कई अनसुने-अनदेखे अनुभवों का विवरण दर्ज है। साथ ही, इसमें देश की शासन व्यवस्था और सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर के रूप में उनके दायित्वों को भी गहराई से साझा किया गया है। यह पुस्तक न केवल एक पूर्व राष्ट्रपति की जीवनगाथा है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की शक्ति, संवैधानिक आदर्शों और सामाजिक-राजनीतिक परिवेश की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करती है। 

संघर्ष से शिखर तक की प्रेरक यात्रा
यह कार्यक्रम भारतीय गणतंत्र की उस मूल भावना का उत्सव है, जिसमें एक साधारण नागरिक अपने दृढ़ संकल्प, परिश्रम और सादगी के बल पर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। उत्तर प्रदेश के एक साधारण ग्रामीण परिवेश (परौंख) से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक का पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द का सफर प्रेरणादायी है।

श्री कोविन्द ने 25 जुलाई 2017 को भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। इससे पहले वह बिहार के राज्यपाल पद पर कार्यरत रहे। अप्रैल 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए और मार्च 2006 तक लगातार दो कार्यकाल पूरे किए। इस दौरान उन्होंने कई संसदीय समितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वकील के तौर पर उन्होंने 1977 से 1979 तक दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। वह सर्वोच्च न्यायालय में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड भी बने। उनकी रुचि कानून, इतिहास, राजनीति और अध्यात्म में है।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live