चंडीगढ़
चेंज आफ लैंड यूज (सीएलयू) को लेकर उठे विवादों के बीच ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) अब 15 हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है।मोहाली और आसपास के क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण और विकास परियोजनाओं के लिए जुटाई जाने वाली इस बड़ी राशि में से 191.16 करोड़ रुपये गुजरात की कंपनी टिप्सन्स कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को फीस के रूप में दिए जाएंगे।
कंपनी को कुल जुटाई जाने वाली राशि का 1.27 प्रतिशत अरेंजर फीस मिलेगी। गमाडा ने अपनी 14 विकास परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण और विकास कार्यों पर 17,686 करोड़ रुपये की जरूरत बताई है।
14 विकास परियोजनाओं की वित्तीय जरूरत को बनाया आधार
गमाडा की फंड जुटाने की योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब मोहाली क्षेत्र में जमीन और रियल एस्टेट परियोजनाओं को लेकर चेंज ऑफ लैंड यूज की प्रक्रिया चर्चा में है।
हालांकि, प्रस्तावित 15 हजार करोड़ रुपये के फंड और सीएलयू विवादों के बीच किसी सीधे संबंध का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है। अथॉरिटी ने अपनी योजना के पीछे 14 विकास परियोजनाओं की वित्तीय जरूरत को आधार बनाया है।
गमाडा के मुख्य प्रशासक की ओर से दिए गए विवरण के अनुसार, अथॉरिटी ने 14 विकास परियोजनाएं शुरू की हैं। इनके लिए चिह्नित जमीन का अधिग्रहण करने और उस पर विकास कार्य करवाने के लिए कुल 17,686 करोड़ रुपये की जरूरत है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए 15 हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई गई है।
पंजाब रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1955 की धारा 51 के तहत जीमाडा कर्ज लेने, डिबेंचर जारी करने या बांड के माध्यम से धन जुटा सकता है। अथॉरिटी ने इसी कानूनी प्रावधान के आधार पर फंड जुटाने की योजना को उचित ठहराया है।
191 करोड़ बतौर फीस दिए जाएंगे
15 हजार करोड़ रुपये जुटाने की प्रक्रिया में गुजरात की कंपनी टिप्सन्स कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को 191.16 करोड़ रुपये अरेंजर फीस के रूप में दिए जाने हैं।
यह सफलता आधारित फीस होगी और कुल प्रस्तावित राशि का 1.27 प्रतिशत है। जीमाडा ने इसके समर्थन में दूसरे राज्यों की संस्थाओं के उदाहरण दिए हैं, जिनमें हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी , आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन और केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड शामिल हैं। इन संस्थाओं ने भी बुनियादी ढांचा विकास के लिए बांड के जरिये धन जुटाया है।
जमीन अधिग्रहण के लिए राज्य के खजाने में पहले से जमा राशि भी इस योजना का महत्वपूर्ण पहलू है। राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट, 2013 के तहत संबंधित विकास अथॉरिटियों ने राज्य के खजाने में 6,400 करोड़ रुपये जमा कराए हैं। इसमें गमाडा की ओर से जमा कराई गई राशि 6,210 करोड़ रुपये है। ऐसे में एक तरफ जमीन अधिग्रहण के लिए हजारों करोड़ रुपये जमा हैं, वहीं दूसरी तरफ विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए 15 हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी है

