सर्वपितृ अमावस्या पर 3 दुर्लभ संयोग, 82 साल में 13वीं बार बनेगा खास योग; शिप्रा-नर्मदा स्नान का महत्व

Editor
4 Min Read

उज्जैन 
82 साल में 13वीं बार बने तीन दुर्लभ संयोग के साथ सर्वपितृमोक्ष अमावस्या पर शनिवार को शिप्रा और नर्मदा में स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है। गजछाया योग में पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध के लिए उज्जैन के सिद्धवट घाट पर रात से ही लोग पहुंच गए।

उज्जैन में भक्तों द्वारा शनिश्चरी अमावस्या पर भगवान शनि को चढ़ाए गए तेल की 24 घंटे बाद नीलामी होगी। वहीं, घाटों पर जूते-चप्पल और कपड़े भी भक्त छोड़ रहे हैं। इन्हें री-साइकिल कर फाइल कवर और तेल जैसे उत्पाद तैयार किए जाएंगे। उज्जैन के सिद्धवट घाट पर देशभर से लोग सुबह 5 बजे से ही पितरों के निमित्त तर्पण और पूजन के लिए पहुंचे। भीड़ को देखते हुए पुलिस ने चार पहिया वाहनों के लिए मंगलनाथ से भैरवगढ़ और भैरवगढ़ से सिद्धवट जाने वाले मार्ग पर आवागमन बंद कर दिया है।

तीन योग एक साथ, पितृ कर्म का विशेष महत्व
पंडित अमर डिब्बेवाला ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में अलग-अलग ग्रह योग और संयोग बनते हैं। जो लोग श्राद्ध के 15 दिनों में घाटों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना नहीं कर पाते, वे सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण करने आते हैं।

इस बार अमावस्या के शनिवार को पड़ने के साथ गजछाया योग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस योग में पितरों के निमित्त किए गए कर्मों का विशेष महत्व है। सूर्य और चंद्रमा को पितरों से जुड़े वैदिक कर्मों का साक्षी माना गया है।

त्रिवेणी शनि मंदिर में आधी रात से लगी कतारें
शनिश्चरी अमावस्या के चलते त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालु देर रात 12 बजे से ही पहुंचने लगे थे। यहां शिप्रा नदी के पानी से स्नान की व्यवस्था की गई है।

श्रद्धालुओं के लिए नदी में फव्वारे लगाए गए हैं, इसलिए डुबकी लगाने की अनुमति नहीं दी गई है। शनि मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालु तेल, काली उड़द, फूल और प्रसाद लेकर भगवान शनि के दर्शन कर रहे हैं।

केडी पैलेस पर भी पहुंचे श्रद्धालु
सर्वपितृ अमावस्या पर केडी पैलेस स्थित शिप्रा नदी के घाट पर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। यहां कुछ श्रद्धालु भूत-प्रेत बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति की धार्मिक मान्यता के चलते नदी में स्नान करते नजर आए।

कई लोग हाथों में जंजीरें और तलवारें लिए तथा अलग-अलग तरह की आवाजें निकालते हुए भी पहुंचे। यह स्थानीय धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी परंपरा है।

कन्या राशि, सूर्य-चंद्र और हस्त नक्षत्र से बनता है गजछाया योग
पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार, जब अमावस्या हस्त नक्षत्र में आती है, तो उसे गजछाया या कुंजरछाया योग कहा जाता है। इस बार सूर्य और चंद्रमा का कन्या राशि में गोचर तथा हस्त नक्षत्र का संयोग इस योग का निर्माण कर रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, यह योग पितृ कर्म के लिए विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान ग्रह स्थिति में शनि मीन राशि में और बृहस्पति कर्क राशि में हैं। बृहस्पति की नौवीं दृष्टि शनि पर पड़ रही है। ज्योतिष शास्त्र में दोनों ग्रहों को धर्म और अध्यात्म से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इस संयोग के दौरान किए जाने वाले धार्मिक कर्मों को विशेष महत्व दिया जाता है।

TAGGED: ,
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live