कोयला घोटाला मामले में कोर्ट पहुंचे विधायक देवेंद्र यादव, आरोपी चंद्रदेव राय और विनोद तिवारी भी रहे मौजूद

Editor
3 Min Read

रायपुर.

कथित कोयला घोटाला में आज आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की स्पेशल कोर्ट में आरोपियों की पेशी है. सुनवाई के लिए आरोपी बनाए गए कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चन्द्रदेव राय और कांग्रेस नेता विनोद तिवारी कोर्ट पहुंचे.

मामले में ACB-EOW ने 9 आरोपियों को समन जारी किया था. मामले में आज अंतिम चालान पेश किए जाने की संभावना है. कोर्ट पहुंचने के दौरान विधायक देवेंद्र यादव ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है, लेकिन प्रदेश की सरकार पर न तो जनता को भरोसा है, और न ही उन्हें. लंबे समय की जांच के बाद अब चार्जशीट पेश की जा रही है. उन्होंने सरकार को कुशासन की सरकार बताते हुए कहा कि वे कांग्रेस और राहुल गांधी के सिपाही हैं, और अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. जेल की सलाखें भी पहले उनका हौसला नहीं तोड़ पाईं, ऐसे में यह षड्यंत्र उनका हौसला क्या तोड़ेगा.

चिंतामणि को लेकर बीजेपी पर साधा निशाना
वहीं चिंतामणि महाराज को लेकर भी देवेंद्र यादव ने बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि जांच की शुरुआत में चिंतामणि महाराज का नाम FIR में प्रमुखता से था, लेकिन बीजेपी में शामिल होने के बाद उनका नाम ही गायब हो गया. ये बीजेपी की स्कीम है, बीजेपी में शामिल होने के बाद मामले खत्म हो जाने का यह जीता-जागता उदाहरण है.

क्या है कोयला घोटाला
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी प्रकरण साल 2020 से 2022 के दौरान कोयला परिवहन पर लगाया गया अवैध शुल्क था. जांच एजेंसियों के अनुसार, राज्य में ऑनलाइन ई-परमिट प्रणाली में बदलाव कर मैन्युअल अनापत्ति प्रमाण पत्र व्यवस्था लागू की गई थी. इसके तहत खदानों से कोयला निकालने और उसके सुचारू परिवहन के एवज में प्रति टन 25 रुपए की दर से अवैध वसूली (कोल लेवी) करने का एक समानांतर सिंडिकेट खड़ा किया गया था. इस प्रक्रिया से प्रतिदिन करोड़ों रुपये की काली कमाई जुटाई जाती थी, जिसका एक बड़ा हिस्सा अधिकारियों, बिचौलियों और राजनीतिक संरक्षण देने वाले व्यक्तियों के बीच नियमित रूप से वितरित किया जाता था.

500 करोड़ रुपए से अधिक की काली कमाई
जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के दौरान प्रति टन 25 रुपए की अवैध लेवी वसूली के जरिए लगभग 500 से 540 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध राशि एकत्रित किए जाने का अनुमान लगाया गया है. जांच रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि इस काली कमाई में से प्रतिदिन 2 से 3 करोड़ रुपये की वसूली की जाती थी, जिसका एक बड़ा हिस्सा बेनामी संपत्तियों की खरीद, राजनेताओं के चुनावी व व्यक्तिगत खर्चों तथा प्रशासनिक अधिकारियों में वितरण के लिए इस्तेमाल किया गया.

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live