मीना कुमारी शिक्षक नियुक्ति मामला: सरकार-JSSC की अपील पर 13 अक्टूबर को होगी सुनवाई

Editor
7 Min Read

रांची
 स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 से जुड़े मीना कुमारी मामले में राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से दायर अपील याचिकाओं पर 13 अक्तूबर को सुनवाई होगी. चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने सुनवाई के लिए उक्त तिथि निर्धारित की है. यह जानकारी प्रतिवादी मीना कुमारी की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने दी.

पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय और जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिप्रावाल ने अदालत को बताया था कि मामले से जुड़ी कुछ अन्य अपीलें भी हैं, जिनमें इसी तरह के मुद्दे उठाये गये हैं. इस पर अदालत ने सरकार और जेएसएससी को संबंधित अपील याचिकाओं की सूची सौंपने का निर्देश दिया था. बताया गया कि राज्य सरकार और जेएसएससी की ओर से अलग-अलग लगभग 100 अपील याचिकाएं दायर कर मीना कुमारी व अन्य के मामले में एकल पीठ द्वारा पारित आदेशों को चुनौती दी गयी है. पूर्व में खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश के अनुपालन को लेकर दायर अवमानना याचिका की सुनवाई पर रोक लगा दी थी.

एक सितंबर को एकल पीठ ने दिया था फैसला
एकल पीठ ने एक सितंबर को मीना कुमारी सहित 258 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए हाइस्कूल शिक्षक नियुक्ति से जुड़े विवाद की जांच के लिए हाइकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अध्यक्षता में एक सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमीशन गठित किया था. कमीशन को पूरे मामले की जांच और सुनवाई कर तीन माह के अंदर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपनी थी. कमीशन की रिपोर्ट को मंत्रिमंडल के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया था. राज्य सरकार को अधिकतम छह सप्ताह के अंदर रिपोर्ट पर निर्णय लेने को कहा गया था. वहीं, अन्य रिक्त 2034 सीटों पर नियुक्ति के लिए याचिकाकर्ताओं को आठ सप्ताह के अंदर अपना अभ्यावेदन जेएसएससी के सचिव को देने का निर्देश दिया गया था. प्राप्त अभ्यावेदनों पर जेएसएससी को छह माह के अंदर नियुक्ति की कार्रवाई पूरी करनी थी.

हालांकि, जस्टिस एसएन पाठक द्वारा कमीशन में शामिल होने में असमर्थता जताये जाने के बाद हाइकोर्ट ने सेवानिवृत्त जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन का अध्यक्ष बनाया. वर्तमान में कमीशन मामले की जांच कर रहा है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कमीशन ने सरकार और जेएसएससी से मेरिट लिस्ट, नियुक्त अभ्यर्थियों के नाम, प्राप्तांक और नियुक्ति तिथि समेत संबंधित दस्तावेज भी मांगे हैं.

कमीशन को इन बिंदुओं पर देनी है रिपोर्ट
कमीशन को मुख्य रूप से यह जांच करनी है कि जेएसएससी ने 2 अगस्त 2022 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद नियुक्तियां करने से पहले उसके निर्देशों के अनुरूप संशोधित योग्यता सूची और अन्य योग्यता सूचियां तैयार की थीं या नहीं. इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं से कम अंक प्राप्त करने वाले पहले से नियुक्त और संरक्षित अभ्यर्थियों में से कितने अभ्यर्थियों को समायोजित किया गया तथा उनकी नियुक्ति और कार्यभार ग्रहण करने की वास्तविक तिथियां सुप्रीम कोर्ट के 2 अगस्त 2022 के निर्णय से पहले की हैं या उसके अनुरूप हैं, इसकी भी जांच होनी है. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में शामिल मूल रिट याचिकाकर्ताओं में से कितने ऐसे अभ्यर्थी हैं, जिनके अपने-अपने विषयों में याचिकाकर्ताओं से कम अंक हैं और जिन्हें प्रतिवादियों द्वारा नियुक्त किया गया है, इसकी भी जांच की जानी है. साथ ही यह भी देखा जाना है कि वे उक्त श्रेणी में नियुक्ति के लिए योग्य थे या नहीं.

कमीशन को यह भी सत्यापित करना है कि वर्ष 2019 में अनुपस्थित रहने या कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले अभ्यर्थियों से संबंधित रिक्तियां, जिनकी संख्या काफी अधिक बतायी गयी है और जिन्होंने अभ्यावेदन नहीं दिया है, वास्तव में कम योग्यतावाले अभ्यर्थियों से भरी गयी हैं या नहीं. इसके अतिरिक्त, जिन अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी वैध कारणों से अस्वीकृत की गयी थी, उन्हें बाद में नियुक्ति दी गयी या नहीं और जिन अभ्यर्थियों के अंक याचिकाकर्ताओं से कम हैं, उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले या 2 अगस्त 2022 के बाद हुई या नहीं, इसका भी सत्यापन किया जाना है.

9613 रिक्तियों को लेकर भी होगी जांच
कमीशन को यह भी देखना है कि राज्य सरकार के 23 फरवरी 2024 के संकल्प के अनुसार कुल 9613 रिक्तियां भरी जानी थीं, तो ये रिक्तियां कैसे और कब भरी गयी. इसके साथ ही विज्ञापित कुल 17,784 रिक्तियों में से 12,046 अभ्यर्थियों के परिणाम प्रभावी रूप से दिये जाने और उन्हें नियुक्ति मिलने से संबंधित स्थिति की भी जांच की जानी है. इसके अलावा वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन मामले से जुड़े किसी अन्य पहलू या मुद्दे को भी अपनी जांच में शामिल कर सकता है.

वर्ष 2016 में शुरू हुई थी चयन प्रक्रिया
जेएसएससी ने वर्ष 2016 में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया शुरू की थी. इसके माध्यम से राज्य के हाइस्कूलों में 17,752 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति होनी थी. नियुक्ति जिलावार मेरिट लिस्ट और स्टेटवाइज मेरिट लिस्ट के आधार पर की गयी थी.मामले में बड़ी संख्या में पद खाली रहने और एक ही नियुक्ति परीक्षा में दो तरह की मेरिट लिस्ट होने को लेकर विवाद सामने आया. इसी विवाद से जुड़े अभ्यर्थियों ने हाइकोर्ट का रुख किया था. मीना कुमारी और अन्य से संबंधित याचिकाओं पर हाइकोर्ट की एकल पीठ के फैसले के बाद अब वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन पूरे मामले की जांच कर रहा है.

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live