ममता बनर्जी के करीबी से बंगाल के मुख्यमंत्री तक: जानिए शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर

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पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो गया है। भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी राज्य के अगले सीएम होंगे। कोलकाता में आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में शुभेंदु के नाम पर मुहर लगी। उनके नाम पर आठ प्रस्ताव और समर्थन प्राप्त हुए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुभेंदु के नाम का ऐलान किया और कहा कि दूसरे नाम के लिए भी विधायकों को पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन सभी से सिर्फ शुभेंदु का ही नाम मिला। सीएम पद की रेस में शुभेंदु ही सबसे आगे चल रहे थे। कई अन्य नामों पर भी अटकलें लगीं, लेकिन शुभेंदु का ही पलड़ा भारी माना जा रहा था।

कांग्रेस से की शुरुआत

शुभेंदु अधिकारी का पूरा परिवार राजनीति से जुड़ा है। उनके पिता शिशिर अधिकारी दिग्गज नेता रह चुके हैं और मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। शुभेंदु के एक भाई सांसद और दूसरे विधायक हैं। शुभेंदु ने अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की और 1995 में कांथी नगरपालिका में पार्षद चुने गए थे। जब ममता बनर्जी ने 1997 में कांग्रेस से अलग होकर टीएमसी बनाई, तब शुभेंदु अधिकारी भी उनके साथ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद, 2006 में, अधिकारी कांथी दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए। उसी वर्ष वे कांथी नगरपालिका के अध्यक्ष भी बने।

नंदीग्राम आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

साल 2007 में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन की अगुवाई की। दरअसल, बंगाल की तत्कालीन लेफ्ट सरकार ने एसईजेड स्थापित करने के लिए एक गांव में दस हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने की योजना बनाई थी। ममता बनर्जी ने इसके खिलाफ आंदोलन किया और उसमें शुभेंदु अधिकारी ने उनका साथ दिया। पूरे आंदोलन के दौरान अधिकारी की अहम भूमिका रही। इसी आंदोलन से ममता बनर्जी की पहली बार सरकार पश्चिम बंगाल में बनी। शुभेंदु की गिनती ममता के करीबी नेताओं में की जाने लगी। वह ममता सरकार में मंत्री भी रहे। इसके अलावा, तमलुक लोकसभा सीट से 2009 और 2014 में सांसद बने।

छह साल पहले भाजपा में हुए शामिल

तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक के बढ़ते प्रभाव की वजह से शुभेंदु नाराज हुए और साल 2020 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी। 17 दिसंबर 2020 को उन्होंने टीएमसी की सदस्यता से इस्तीफा दिया। 19 दिसंबर 2020 को, उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा ज्वाइन कर ली। धीरे-धीरे वह अमित शाह के भरोसेमंद नेताओं की लिस्ट में शामिल हो गए। 2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराकर सभी को चौंका दिया। भले ही भाजपा को 77 सीटें मिलीं, लेकिन पार्टी का जनाधार राज्य में लगातार बढ़ता गया। 2026 विधानसभा चुनाव में शुभेंदु ने भवानीपुर से भी चुनाव लड़ा और ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से पराजित कर दिया। अब वे राज्य के अगले व भाजपा के पश्चिम बंगाल में पहले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।

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