ग्वालियर सड़क घोटाले में बड़ा खुलासा: हाई कोर्ट की रिपोर्ट में फर्जी लैब टेस्ट उजागर, नगर निगम को नोटिस

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ग्वालियर

 ग्वालियर में सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए हाई कोर्ट द्वारा गठित आयोग की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आयोग ने कोर्ट को बताया कि श्मशान से गुड़ा तिराहा, कस्तूरबा चौक और गुड़ा-गुड़ी का नाका से बेटी बचाओ होते हुए हनुमान टाकीज तक की सड़कों से लिए गए नमूनों की जांच में गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।

जांच के दौरान संबंधित सड़कों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में ऐसी प्रयोगशाला रिपोर्ट भी मिलीं, जिन्हें जांच आयोग ने कथित तौर पर फर्जी पाया है। आयोग ने 17 सितंबर को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

रिपोर्ट के अनुसार डीपीआर में लगी प्रयोगशाला रिपोर्टों की तुलना संबंधित प्रयोगशाला के मूल वर्षवार रजिस्टर और अभिलेखों से कराई गई। जांच में रिपोर्टों में दर्ज प्रयोगशाला क्रमांक मूल अभिलेखों से मेल नहीं पाए गए। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी। इस दिन कुलदीप नर्सरी से फूलबाग चौराहे तक लिए गए सड़क नमूनों की रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा।
लैब प्रभारी का शपथपत्र भी रिपोर्ट में शामिल

आयोग ने रिपोर्ट में बताया कि जोनल रिसर्च लैबोरेटरी, लोक निर्माण विभाग, ग्वालियर के प्रभारी ने 29 अगस्त 2026 को शपथपत्र दिया। इसमें उन्होंने कहा कि डीपीआर में लगी प्रयोगशाला रिपोर्टों पर दर्ज क्रमांक 165/02-2020, 551/02-2020 और 500/01-2015 मूल प्रयोगशाला रिपोर्ट या रजिस्टर की प्रविष्टियों से संबंधित नहीं हैं। लैब प्रभारी के अनुसार ये रिपोर्टें जोनल रिसर्च लैबोरेटरी द्वारा तैयार, जारी या प्रमाणित नहीं की गईं और न ही मूल प्रयोगशाला अभिलेखों का हिस्सा हैं। आयोग ने मूल वर्षवार प्रयोगशाला रजिस्टर के संबंधित पृष्ठों की प्रमाणित प्रतियां भी रिपोर्ट के साथ संलग्न की हैं।
माप पुस्तिका भी गायब मिली

जांच आयोग को एक सड़क की डीपीआर के साथ संबंधित माप पुस्तिका भी नहीं मिली। आयोग ने नगर निगम से माप पुस्तिका मांगी तो निगम ने बताया कि संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ 24 अगस्त 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस माप पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराने या प्रस्तुत नहीं किए जाने के संबंध में है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संबंधित सड़क की पुरानी डीपीआर में पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ था।

बाद में नगर निगम ने संबंधित ठेकेदार को गारंटी अवधि में सड़क की मरम्मत कराने के लिए नोटिस जारी किया था। जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि एक ही सड़क से संबंधित अलग-अलग डीपीआर में पुराने प्रयोगशाला प्रतिवेदन लगाए गए थे।

हाई कोर्ट ने रिपोर्ट की प्रति नगर निगम के अधिवक्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम आयुक्त के शपथपत्र के साथ रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
कोर्ट ने कहा- शहरवासियों के साथ भी धोखा!

रिपोर्ट सामने आने पर हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि ग्वालियर के लोग खराब सड़कों की वजह से परेशान हैं, लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि भुगतान हासिल करने के लिए कथित फर्जी प्रयोगशाला रिपोर्ट लगाकर उनके साथ भी धोखा किया गया। हालांकि, कोर्ट ने नगर निगम को जांच आयोग की रिपोर्ट पर जवाब देने का अवसर दिया है। निगम की ओर से अधिवक्ता गौरव मिश्रा ने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जवाब नगर निगम आयुक्त के शपथपत्र के साथ ही दाखिल किया जाए।
एनएचएआई ने कोर्ट की सख्ती के बाद दिए दस्तावेज

सुनवाई के दौरान जांच आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया ने बताया कि 15 सितंबर को हाई कोर्ट ने कड़ा आदेश दिया था। इसमें निर्देशों की अवहेलना होने पर एनएचएआई के परियोजना निदेशक भरत सिंह जौया के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की संभावना जताई गई थी। इसके बाद एनएचएआई ने 16 सितंबर को आयोग द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए।

आयोग ने बताया कि कुलदीप नर्सरी से फूलबाग चौराहे तक लिए गए नमूनों की रिपोर्ट 18 सितंबर को पेश की जाएगी। वहीं एनएचएआई के अधीन अन्य सड़कों से संबंधित लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट और अंतिम एनएसवी रिपोर्ट 21 सितंबर को प्रस्तुत की जाएगी।

 

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