कार को पीछे से टक्कर मारना हमेशा गलती नहीं, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज की

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चंडीगढ़.

सड़क हादसे में आगे चल रहे वाहन से पीछे से टक्कर होने मात्र के आधार पर पीछे चल रहे वाहन के चालक को लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट करते हुए बीमा कंपनी की तीनों अपीलें खारिज कर दी हैं।

अदालत ने कहा कि सह-दोषिता यानी कार चालक की भी लापरवाही साबित करने की जिम्मेदारी उस पक्ष की है, जो इसका आरोप लगा रहा है। केवल पीछे से टक्कर को आधार बनाकर यह जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। मामला 29 मार्च 2009 को हुए सड़क हादसे से जुड़ा है। हादसे में सुखविंदर सिंह और प्रेमचंद की मृत्यु हो गई थी, जबकि सुब्बा सिंह घायल हुए थे। तीनों एक मारुति कार से गांव थेह बुटाना से लुधियाना जा रहे थे। समराला चौक के पास आगे चल रहे ट्रक के चालक बलजिंदर सिंह ने कथित तौर पर बिना संकेत दिए बीच सड़क अचानक ब्रेक लगा दिए, जिसके कारण कार ट्रक से जा टकराई।

सह-दोषिता का दावा हाई कोर्ट में खारिज
बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि कार ट्रक से पीछे से टकराई थी, इसलिए कार चालक सुखविंदर सिंह की भी सह-दोषिता थी। हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि बीमा कंपनी ने न तो अधिकरण के समक्ष सुखविंदर सिंह की सह-दोषिता की कोई विशिष्ट दलील रखी और न ही इस संबंध में कोई मुद्दा तय कराने का प्रयास किया। वहीं ट्रक चालक खुद गवाही देने के लिए अदालत में पेश नहीं हुआ और यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि उसने अचानक ब्रेक क्यों लगाए थे या पीछे आ रहे यातायात को कोई संकेत दिया था या नहीं।

हाई कोर्ट से पीड़ित परिवारों को राहत
अदालत ने सुखविंदर सिंह की मृत्यु के मामले में कुल मुआवजा 9.96 लाख रुपये निर्धारित किया। पहले अधिकरण ने 5.81 लाख रुपये दिए थे। इस तरह स्वजन को अतिरिक्त 4.16 लाख रुपये मिलेंगे। 24 वर्षीय सुखविंदर के मामले में भविष्य की संभावनाओं के लिए 40 प्रतिशत वृद्धि और 18 का गुणक लागू किया गया। वहीं 27 वर्षीय प्रेमचंद की मृत्यु के मामले में कुल मुआवजा 11.97 लाख रुपये तय किया गया। पहले मिले 6.09 लाख रुपये के अतिरिक्त अब 5.89 लाख रुपये मिलेंगे। इसमें पत्नी, तीन नाबालिग बच्चों और माता-पिता को वैधानिक अधिकारों के अनुसार मुआवजा दिया गया है।

पीड़ित को मिलेगा 15 हजार अतिरिक्त
सुब्बा सिंह के मामले में स्थायी दिव्यांगता का प्रमाण प्रस्तुत नहीं होने के कारण भविष्य की आय में नुकसान का मुआवजा नहीं दिया गया। हालांकि चोटों की गंभीरता को देखते हुए कुल मुआवजा 60 हजार से बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दिया गया। उन्हें 15 हजार रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। तीनों मामलों में बढ़ा हुआ मुआवजा बीमा कंपनी और वाहन चालक-सह-मालिक संयुक्त रूप से देंगे। इस राशि पर दावा याचिका दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

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