उज्जैन में 100 साल पुरानी शाही मस्जिद हटाने का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने खारिज की दोनों याचिकाएं

Editor
4 Min Read

उज्जैन

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच गोपाल मंदिर रोड चौड़ीकरण परियोजना को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है. करीब 100 साल पुरानी शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर दोनों याचिकाओं को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने खारिज कर दिया है. इस फैसले के बाद नगर निगम के लिए सड़क चौड़ीकरण की राह आसान हो गई है. हालांकि मस्जिद प्रबंधन और मुस्लिम समाज ने फैसले पर असहमति जताते हुए ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कही है। 
 
हाईकोर्ट ने खारिज की दोनों याचिकाएं
सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में कई विकास कार्य किए जा रहे हैं. इसी क्रम में गोपाल मंदिर रोड के चौड़ीकरण की योजना बनाई गई है. इस परियोजना की जद में आने वाली शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में सुनवाई हुई. जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई करने के बाद याचिकाएं खारिज कर दीं। 

निगम की कार्रवाई का रास्ता हुआ साफ
हाईकोर्ट का विस्तृत लिखित आदेश अभी जारी होना बाकी है, लेकिन याचिकाएं खारिज होने के बाद नगर निगम के लिए आगे की कार्रवाई का रास्ता खुल गया है. माना जा रहा है कि अब निगम सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत मस्जिद को हटाने या विस्थापन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकता है। 

मुस्लिम समाज ने जताई आपत्ति
नगर निगम की ओर से मस्जिद को हटाने का नोटिस जारी होने के बाद से ही मुस्लिम समाज इसका विरोध कर रहा है. समाज के लोगों का कहना है कि शाही मस्जिद केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक महत्व भी रखती है. इसी आधार पर इसे यथास्थान बनाए रखने की मांग की जा रही थी। 

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सैय्यद अशहर अली वारसी ने कहा कि अदालत का विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है. आदेश का अध्ययन करने के बाद कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा. उन्होंने संकेत दिए हैं कि मामले को डबल बेंच या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। 

सिंहस्थ के लिए अहम माना जा रहा मार्ग
प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ 2028 के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है. ऐसे में शहर के प्रमुख मार्गों को चौड़ा करना जरूरी माना जा रहा है. गोपाल मंदिर रोड शहर के सबसे व्यस्त और अपेक्षाकृत संकरे रास्तों में शामिल है. प्रशासन का तर्क है कि सड़क चौड़ी होने से यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और भीड़ प्रबंधन में मदद मिलेगी। 

इन लोगों ने दायर की थीं याचिकाएं
पहली याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान और शाही मस्जिद इंतजामिया कमेटी की ओर से दायर की गई थी. इसमें मध्य प्रदेश शासन, नगर निगम उज्जैन, कलेक्टर और अन्य अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया था. दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान के अध्यक्ष अरशान हुसैन की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें शासन, नगर निगम और वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था। 

पुराने दस्तावेजों का दिया गया हवाला
मस्जिद प्रबंधन की ओर से अदालत में दावा किया गया कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी और ऐतिहासिक महत्व की है. याचिकाकर्ताओं ने 17 मार्च 1925 से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि उस समय जारी एक पत्र में भूमि अधिग्रहण के बाद मस्जिद के शेष हिस्से को यथावत बनाए रखने का उल्लेख किया गया था. इसी आधार पर मस्जिद को संरक्षित रखने की मांग की गई थी। 

 

TAGGED: ,
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live