संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट की अनोखी पहल, बेटे से कहा- मां के पैर छूकर अपने पापों के लिए मांगो माफी

Editor
3 Min Read

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट में मां-बेटे के संपत्ति विवाद में एक अलग ही नजारा देखने को मिला. कोर्ट ने बेटे से कहा कि मां के पैर छूकर माफी मांगो और अपने पापों के लिए माफी मांगो. दरअसल, कोर्ट ने इस विवाद की सुनवाई के दौरान बेटे को मां के पास जाकर माफी मांगने और आशीर्वाद लेने की सलाह थी. कोर्ट ने कहा कि मां का स्थान हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है.जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी.  सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने बेटे से मौखिक रूप से कहा कि आपको अपनी मां के पैर छूकर माफी मांगनी चाहिए, अपने सभी पापों के लिए माफी मांगिए। 

क्या बेटे का ऐसा करना गलत नहीं है- सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस शर्मा ने अदालत में मौजूद वकील को संबोधित करते हुए भी कहा कि क्या बेटे का ऐसा करना गलत नहीं है? हम बेटे से कह रहे हैं कि वापस मां के पास जाए, उनके पैर छूए, उन्हें महसूस करे, माफी मांगे और उनका आशीर्वाद ले. मामला उस संपत्ति से जुड़ा है, जिसकी मां और उनके पति एकमात्र मालिक हैं.  माता-पिता ने प्रेम और स्नेह के चलते बेटे और उसकी पत्नी को संपत्ति की पहली मंजिल पर बिना किराए के लाइसेंसी के तौर पर रहने की अनुमति दी थी। 

बेटे और उसकी पत्नी पर परेशान करने के आरोप
माता-पिता का आरोप था कि बाद में बेटे और उसकी पत्नी ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया और संपत्ति उनके नाम ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बेटे ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा किया. इसके बाद माता-पिता ने अखबार में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कर बेटे से संबंध समाप्त करने की घोषणा की. उन्होंने बेटे के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई और संपत्ति खाली करने को कहा. माता-पिता ने संपत्ति का कब्जा वापस लेने, स्थायी निषेधाज्ञा और हर्जाने की मांग को लेकर मुकदमा दायर किया। 

माता-पिता ही संपत्ति के एकमात्र मालिक थे- ट्रायल कोर्ट ने माना
ट्रायल कोर्ट ने माना कि माता-पिता संपत्ति के एकमात्र मालिक हैं और बेटे तथा उसकी पत्नी केवल लाइसेंसी हैं. लाइसेंस वैध रूप से समाप्त किए जाने के बाद दोनों को पहली मंजिल का कब्जा खाली करना होगा. दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल को ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. इसके बाद बेटे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की तो सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने बेटे को मां के पास जाकर माफी मांगने और उनका आशीर्वाद लेने की मौखिक सलाह भी दी। 

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live