एमपी के दो दिग्गज BJP नेताओं को दक्षिण में झटका, केरल और तमिलनाडू में चुनाव हारे

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भोपाल 
5 राज्यों के चुनाव परिणाम यूं मध्यप्रदेश की राजनीति को प्रभावित नहीं करते. लेकिन दक्षिण के दो राज्यों तमिलनाडु और केरल में मध्य प्रदेश से सीधा जुड़ाव रखने वाले बीजेपी नेताओं की हार का असर यहां तक आया है. मध्य प्रदेश में लंबे समय से बीजेपी दक्षिण के अपने नेताओं को राज्यसभा भेजती रही है। 

एल मुरुगन केन्द्र सरकार में मंत्री हैं, वह मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं. इनके अलावा जार्ज कुरियन ने भी विधानसभा चुनाव लड़ा. मुरुगन और कुरियन की हार की वजह से इन चुनावों का असर मध्य प्रदेश तक भी आया है. इन नेताओं के चुनाव हारने से मध्य प्रदेश बीजेपी के कुछ नेताओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। 

असली झटका लगा मुरुगन की हार से
बीजेपी ने तमिलनाडु में केन्द्र सरकार में मंत्री रहे एल मुरुगन को भी चुनाव मैदान में उतारा. मुरुगन मध्य प्रदेश के कोटे से राज्यसभा में हैं. अप्रैल 2030 में उनका कार्यकाल खत्म होगा. इनके अलावा केरल से जार्ज कुरियन का कार्यकाल अप्रैल 2026 तक ही था. इन दोनों नेताओं के चुनाव जीतने की आस मध्यप्रदेश में भी बीजेपी नेताओं को थी. जार्ज कुरियन का कार्यकाल तो खैर पूरा ही हो रहा है. लेकिन मुरुगन अगर ये विधानसभा चुनाव जीत जाते तो उनकी राज्यसभा सीट खाली हो जानी थी. राज्यसभा सीट पर नजर जमाए मध्यप्रदेश के नेताओं को मौका मिल सकता था। 

बीजेपी के दिग्गज दक्षिण में ऐसे हारे
मध्य प्रदेश के रास्ते राज्यसभा में गए ये दोनों नेता तमिलनाडु और केरल से विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरे. केन्द्रीय राज्य मंत्री जार्ज कुरियन केरल की कांरिजापल्ली सीट से बीजेपी के उम्मीदवार थे. चुनाव नतीजों में उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार ने करीब 29 हजार वोटों से शिकस्त दी. तमिलनाडु की अविनाशी सीट से बीजेपी ने अपने वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन को मैदान में उतारा था. वे भी अपनी सीट नहीं बचा सके. वह टीवीके की आंधी में अपनी सीट नहीं बचा सके. इस सीट पर टीवीके के कमाली एस ने 84 हजार से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की. मुरुगन दूसरे नंबर पर रहे. उन्हें 68 हजार से ज्यादा वोट मिले। 

सभाओं में उमड़ी थी भी़ड़, मोहन यादव ने भी किया था प्रचार
एल मुरुगन ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी थी. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उनके लिए चुनाव प्रचार में गए थे. रैलियां की थी. तमिलनाडु में चुनाव प्रभार संभाल रहे अरविंद मेनन ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा "दक्षिण में अभी हमें और मेहनत करनी है. यहां भी हमने पूरी रणनीति के साथ काम किया. हमें जो उम्मीद थी नतीजे वैसे नहीं आए हैं. लेकिन बीजेपी का कार्यकर्ता हर एक हार से सबक लेकर आगे बढ़ता है और फिर मैदान में जुटता है. हम भी जुटेंगे और लक्ष्य को प्राप्त करेंगे। 

कौन हैं एल मुरुगन?
एल. मुरुगन मौजूदा समय में तमिलनाडू की राजनीति में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं। वो तमिलनाडू में बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं और वर्तमान में मोदी सरकार में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री हैं। वो राज्यसभा में मध्य प्रदेश के कोटे से सांसद हैं। 2024 में उन्हें दूसरी बार राज्यसभा के लिए मध्य प्रदेश से चुना गया था। वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी उनका नाता है। वो मद्रास हाईकोर्ट में वकालत करते थे। 15 साल तक वकालत के बाद वो राजनीति में आए हैं।

कौन हैं जॉर्ज कुरियन
वहीं, जॉर्ज कुरियन की बात करें तो वो भी मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। वर्तमान में वो मोदी सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण और मत्स्य पालन राज्य मंत्री हैं। वह केरल में बीजेपी का पुराना चेहरा माने जाते हैं। 1980 से वो भाजपा से जुड़े हैं और अबतक कई पदों पर रह चुके हैं और विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। उनकी केरल में ईसाई समुदाय में पैठ मानी जाती है। वह केरल में भी भाजपा में विभिन्न पदों पर रहे हैं।

मजबूत उम्मीदवारों के तौर पर उतारे गए थे दोनों दिग्गज
आपको बता दें कि, जॉर्ज कुरियन और एल. मुरुगन दोनों ही मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। कुरियन का कार्यकाल 19 जून 2026 में खत्म हो रहा है, जबकि मुरुगन का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक जारी रहेगा। इन दोनों नेताओं को भाजपा ने अलग-अलग राज्यों में मजबूत उम्मीदवार के तौर पर उतारा गया था, लेकिन चुनावी नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।

राज्यसभा चुनावों और पार्टी की रणनीति पर असर के आसार
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इनकी हार का असर आने वाले राज्यसभा चुनावों और पार्टी की रणनीति पर भी पड़ने की संभावना है। खास बात ये है कि, मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें जून 2026 में खाली होने वाली हैं, जिनमें दो भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह और भाजपा की ओर से सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल भी उसी समय पूरा होने जा रहा है।

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