बंगाल भाजपा के हाथ में, महुआ मोइत्रा ने नतीजों के बाद बदला सुर

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बंगाल भाजपा के हाथ में, महुआ मोइत्रा ने नतीजों के बाद बदला सुर
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कलकत्ता

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने मंगलवार को बंगाल में भाजपा की जबरदस्त जीत पर अपनी चुप्पी तोड़ी, तो उनके सुर बदले हुए नजर आए। महुआ ने एक्स पर किए ट्वीट में लिखा- अगर बंगाल को भाजपा चाहिए थी, तो बंगाल को भाजपा मिल गई। मगर इसी ट्वीट के आखिरी में उन्होंने लड़ाई जारी रखने के संकेत दिए।

EVM से छेड़छाड़ के आरोप और फिर गायब
मोइत्रा मोइत्रा वोटों की गिनती के दिन सुबह-सुबह खुलकर बोल रही थीं। उन्होंने बड़े पैमाने पर EVM से छेड़छाड़ और स्ट्रॉन्ग रूम में लोड-शेडिंग का आरोप लगाए थे। काउंटिंग वाले दिन महुआ ने सुबह 8.44 बजे एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्हें अपने समर्थकों के बीच बैठा दिखाया गया था। लेकिन, जैसे-जैसे नंबर आने लगे उन्होंने खामोशी ओढ़ ली और वो गायब सी हो गईं।

वापस आईं, तो महुआ के बदल गए सुर
इसके बाद नतीजे आए और वो गायब रहीं। आज 5 मई को उन्होंने जनता के जनादेश को स्वीकारते हुए एक ट्वीट किया। इसमें उनके सुर बदले हुए नजर आए। उन्होंनें लिखा- "लोगों की इच्छा सर्वोपरी है। अगर बंगाल को भाजपा चाहिए थी, तो बंगाल को भाजपा मिल गई है। हम इसका सम्मान करते हैं। हमने सोच से भी ज़्यादा मुश्किलों के खिलाफ, एक ऊबड़-खाबड़ पिच पर अच्छी लड़ाई लड़ी। इसके लिए मुझे अपने लीडर और अपनी पार्टी पर गर्व है।”

महुआ ने लड़ाई जारी रखने के दिए संकेत
एक तरफ जहां उनके सुर बदले हुए नजर आए, तो वहीं ट्वीट के आखिरी हिस्से में महुआ लड़ाई जारी रखने का संकेत देते हुए नजर आईं। उन्होंने अपना मैसेज यह कहकर खत्म किया- "हम एक ऐसे देश के लिए लगातार खड़े रहेंगे और लड़ते रहेंगे, जहां शासन संविधान के अनुसार चले, न कि किसी बहुसंख्यक की ताकत या दबाव के आधार पर। जय हिंद।”

भाजपा ने फतह किया बंगाल
असल में, मोइत्रा के लोकसभा इलाके में पूरी तरह से उलटफेर हुआ, जिसमें कई असेंबली सीटें BJP के खाते में गईं। इनमें कृष्णानगर उत्तर और कृष्णानगर दक्षिण शामिल हैं, जहाँ BJP कैंडिडेट तारक नाथ चटर्जी और साधन घोष ने आराम से जीत दर्ज की।

आपको बताते चलें कि भाजपा ने सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई से ज़्यादा बहुमत हासिल करके इतिहास रच दिया। इस तरह TMC का 15 साल का राज खत्म हो गया और कोलकाता और आस-पास के जिलों वाले प्रेसिडेंसी इलाके में मौजूदा पार्टी के मजबूत किले टूट गए।

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