ग्वालियर और चंबल संभाग में पहली बार किसी शासकीय अस्पताल में हुआ किडनी ट्रांसप्लांट

Editor
6 Min Read

भोपाल 

प्रदेश के सभी अंचलों में उच्चस्तरीय और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए राज्य शासन निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में ग्वालियर के गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में ग्वालियर और चंबल संभाग के किसी शासकीय चिकित्सीय संस्थान में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट की सफल प्रक्रिया पूरी होना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने इस उपलब्धि पर गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय, सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की पूरी चिकित्सा टीम और विशेषज्ञों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में जटिल और अत्याधुनिक उपचार सुविधाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकता है। अंग प्रत्यारोपण जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधा का ग्वालियर में शुरू होना इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश के बड़े शहरों के साथ-साथ विभिन्न अंचलों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा का लाभ क्षेत्र के जरूरतमंद मरीजों को मिलेगा और आयुष्मान योजना के माध्यम से नि:शुल्क उपचार उपलब्ध होना सरकार की जनकल्याणकारी प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।

ग्वालियर के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांट के बाद मरीज और डोनर दोनों की हालत स्थिर है और चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। छतरपुर निवासी  कृष्णकांत गुप्ता (60 वर्ष) की दोनों किडनियां खराब हो गई थीं। परिवार की सहमति के बाद उनकी पत्नी मती मीना गुप्ता (55 वर्ष) ने पति को किडनी दान करने की इच्छा जताई। इसके बाद मरीज और डोनर की आवश्यक मेडिकल जांच, काउंसलिंग, अनुकूलता परीक्षण तथा ट्रांसप्लांट से संबंधित अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद मरीज और डोनर को 29 अगस्त को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया।

रविवार सुबह करीब 8:30 बजे किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू हुई। सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी, एनेस्थीसिया और यूरोलॉजी विभाग के नेतृत्व में मणिपाल हॉस्पिटल के यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभागाध्यक्ष डॉ. विकास जैन के सहयोग से विशेषज्ञों की टीम ने पूरी प्रक्रिया को पूर्ण किया। करीब साढ़े छह घंटे चली जटिल प्रक्रिया दोपहर लगभग 3 बजे पूरी हुई। ट्रांसप्लांट के दौरान मरीज और डोनर की स्थिति पर विशेषज्ञों ने लगातार नजर रखी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार पूरी प्रक्रिया निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत की गई और किसी प्रकार की बड़ी समस्या सामने नहीं आई।

आयुष्मान कार्ड से नि:शुल्क हुआ ट्रांसप्लांट

 गुप्ता का किडनी ट्रांसप्लांट आयुष्मान योजना के तहत नि:शुल्क किया गया। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए भी शासकीय अस्पताल में अत्याधुनिक अंग प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध होने का मार्ग मजबूत हुआ है। परिजनों ने अस्पताल की पूरी टीम और शासन की स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति आभार जताया।

इंफेक्शन से बचाव के लिए विशेष आईसीयू की व्यवस्था

ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को संक्रमण से बचाना सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मरीज के लिए अलग से आईसीयू की व्यवस्था की गई है। अस्पताल में सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम होने के बावजूद ट्रांसप्लांट मरीज के आईसीयू में अलग से एसी की व्यवस्था की गई है, ताकि संक्रमण का खतरा न्यूनतम रखा जा सके। मरीज के कक्ष में डॉक्टरों और अधिकृत चिकित्सा स्टाफ के अलावा अन्य किसी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। मरीज को सात दिन तक मेडिसिन, नेफ्रोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के चिकित्सकों की विशेष निगरानी में रखा जाएगा। इसके लिए चिकित्सकों की राउंड-द-क्लॉक ड्यूटी लगाई गई है। किडनी ट्रांसप्लांट को सफल बनाने में डॉ. नीलिमा टंडन, डॉ. प्रशांत वास्तव, डॉ. शिवम यादव, डॉ. अंकित शर्मा, डॉ. सीमा शिंदे, डॉ. जिंदल, डॉ. नम्रता जैन, डॉ. कुशल, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर कविता और राहुल सहित पूरी चिकित्सा टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

परिजनों ने जताया आभार

 कृष्णकांत गुप्ता के बेटे सुमित कनकने ने बताया कि ट्रांसप्लांट के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आई। उन्होंने बताया कि पूरा ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत हुआ है। सुमित ने महाविद्यालय अधिष्ठाता प्रो. डॉ. आर.के.एस. धाकड़, डॉ. शिवम यादव और डॉ. अंकित शर्मा का आभार जताते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों से ही ग्वालियर में यह ट्रांसप्लांट संभव हो सका।

महाविद्यालय अधिष्ठाता प्रो. डॉ. आर.के.एस. धाकड़ ने कहा कि सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में पहला किडनी ट्रांसप्लांट होना गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय और पूरे ग्वालियर और चंबल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में शामिल मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. विकास जैन ने कहा कि वे अपनी टीम के साथ दिल्ली से यहां आए और पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के स्टाफ की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि कार्य के दौरान उन्हें ऐसा महसूस नहीं हुआ कि वे किसी नए सेटअप में पहली बार काम कर रहे हैं।

 

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live