रायपुररानी (पंचकूला)
टांगरी नदी के तेज बहाव ने रायपुररानी क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। नदी के लगातार बदलते रुख और तेज कटाव के कारण खेड़ी, ढंडारडू, बटवाल, हरीपुर, मौली, नटवाल और टोडा सहित कई गांवों में कृषि भूमि प्रभावित हुई है।
कई स्थानों पर किसानों की जमीन कटकर नदी में समा चुकी है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। तेज बहाव के कारण खटौली से खेड़ी को जोड़ने वाली सड़क का भी काफी हिस्सा नदी में बह गया है। सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों के आवागमन में परेशानी बढ़ गई है।
वहीं नदी के किनारे लगातार हो रहे कटाव के चलते आसपास की और कृषि भूमि पर भी खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि नदी का बहाव लगातार अपना रुख बदल रहा है।
यदि समय रहते कटाव रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में और अधिक कृषि भूमि तथा संपर्क मार्ग नदी की चपेट में आ सकते हैं। इससे क्षेत्र के किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
प्रशासनिक इंतजामों पर उठाए सवाल
किसानों ने प्रशासनिक प्रबंधों पर सवाल उठाते हुए रोष जताया है। उनका आरोप है कि टांगरी नदी के कटाव को रोकने के लिए समय रहते पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए।
किसानों का कहना है कि बरसात और नदी के तेज बहाव से पहले यदि संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा कार्य कराए जाते तो कृषि भूमि और सड़क को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों और नदी किनारे के क्षेत्रों का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। कटाव प्रभावित स्थानों पर पत्थरों, क्रेट वायर और अन्य आवश्यक उपायों के माध्यम से पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ताकि आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
नुकसान का सर्वे कर मुआवजे की मांग
किसानों ने नदी में समाई कृषि भूमि और फसलों के नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही खटौली-खेड़ी सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की तत्काल मरम्मत कराकर ग्रामीणों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।

