रक्षाबंधन आज, भद्रा का साया नहीं; चंडीगढ़ में हनुमान जी को बांधी जाएगी 12 फीट की राखी

Editor
5 Min Read

चंडीगढ़ 
रक्षाबंधन और रक्खड़ पुन्या के मौके पर पंजाब-चंडीगढ़ में आज कई खास आयोजन होंगे। रक्षाबंधन पर इस बार भद्रा की छाया नहीं है और सुबह 6 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का शुभ मुहूर्त रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पूरे दिन भी राखी बांधी जा सकती है।

वहीं, चंडीगढ़ के सेक्टर-40 बी स्थित श्री हनुमंत धाम में 32 फीट ऊंची वीर हनुमान जी की प्रतिमा के लिए बहनों ने 12¼ फीट से अधिक लंबी पर्यावरण अनुकूल राखी तैयार की है, जिसे सुबह 11:15 बजे विधि-विधान से बांधा जाएगा।

दूसरी ओर, रक्खड़ पुन्या के अवसर पर बाबा बकाला में राज्य स्तरीय समारोह होगा, जिसमें सीएम भगवंत मान महिलाओं को ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ के तहत सम्मान राशि जारी करेंगे। योजना के तहत अब तक 76 लाख 5 हजार महिलाएं रजिस्टर्ड हैं। सामान्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपए और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपए की सम्मान राशि दी जा रही है।

चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा
ज्योतिषाचार्य रचना शर्मा के अनुसार, इस बार पूर्णिमा उदया तिथि में है और सुबह का समय शुभ है, हालांकि पूरे दिन भी राखी बांधी जा सकती है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन पर भद्रा की छाया नहीं है, लेकिन 27 अगस्त से पंचक शुरू हो चुके हैं। इसलिए राखी बांधने से पहले घर के पूजा स्थल पर राखी चढ़ाने की सलाह दी गई है। वहीं, आचार्य सुमित वेदपाठी के अनुसार, 28 अगस्त को चंद्रग्रहण भी लगेगा, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा।

ऐसे में यहां इसका कोई सूतक काल या धार्मिक प्रभाव मान्य नहीं होगा और श्रद्धालु बिना किसी संशय के पूरे उत्साह व विधि-विधान के साथ रक्षाबंधन मना सकते हैं। इस साल रक्षाबंधन का ऐसा मुहूर्त आया है कि न तो भद्रा का प्रभाव है और न ही कोई अन्य बाधा। आज बहनें निश्चिंत होकर अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।

सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी भद्रा
आचार्य सोहन वेदपाठी के अनुसार, रक्षाबंधन का मुहूर्त तय करने के लिए दो चीजें देखी जाती हैं। एक पूर्णिमा तिथि होनी चाहिए दूसरा भद्रा काल न हो। इस बार भद्रा काल सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो गया। इसलिए सुबह राखी बांधने के समय भद्रा की बाधा नहीं रहेगी।

यही कारण है कि 28 अगस्त की सुबह का समय राखी बांधने के लिए सर्वोत्तम है। ज्योतिषाचार्य रचना शर्मा का कहना है कि बहनें कोशिश करें कि पूर्णिमा तिथि में ही राखी बांधे, लेकिन उसके बाद भी राखी बांधने में कोई दोष नहीं है। उनका कहना है कि हम उदया तिथि को ही पूरे दिन की तिथि मानते हैं। ऐसे में पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है।

पूजा की थाली में ये चीजें रखें
आचार्य के अनुसार, राखी बांधने से पहले पूजा की थाली तैयार की जा सकती है। इसमें राखी, मौली, रोली या कुमकुम, अक्षत यानी चावल, दीपक, मिठाई और फूल रखे जाते हैं। कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार नारियल, मौली, फल और पानी का कलश भी रखते हैं। पहले भगवान की पूजा की जाती है। इसके बाद भाई को तिलक लगाया जाता है, चावल लगाए जाते हैं और आरती करने के बाद उसकी कलाई पर पहले मौली और फिर राखी बांधी जाती है।

अटारी बॉर्डर पर जवानों के साथ रक्षाबंधन मनाएंगी चावला
पूर्व मंत्री व भाजपा नेता लक्ष्मी कांता चावला हर साल अटारी बॉर्डर पर जाकर बीएसएफ जवाने के साथ रक्षा बंधन का पर्व मनाती हैं। वो राखियां लेकर जाती हैं और जवानों को राखियां बांधकर उनके कुशल मंगल की कामना करती हैं। अन्य संस्थाओं से जुड़ी महिलाएं भी रक्षा बंधन के पर्व पर अटारी बॉर्डर जाकर जवानों की कलाई में रक्षा सूत्र बांधती हैं।

इसके अलावा पंजाब की जेलों में हर साल कैदियों और हवालातियों को उनकी बहनें राखी बांधने जाती हैं। इसी तरह महिला जेलों में बंद बहनों से राखी बंधवाने के लिए उनके भाई भी पहुंचते हैं। जेल प्रशासन की तरफ से इस मौके पर विशेष इंतजाम किए जाते हैं।

श्री दंडी स्वामी मंदिर में राखी बांधने आती हैं महिलाएं
लुधियाना के दंडी स्वामी मंदिर में बड़ी संख्या में महिलाएं राखी लेकर पहुंचती हैं। महिलाएं श्री दंडी स्वामी जी को राखियां अर्पित करती हैं। इसी तरह लोग अलग अलग मंदिरों में भगवान का राखियां अर्पित करने जाती हैं।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live