हरियाणा में नकली पनीर-घी पर सख्ती, एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट के उत्पादन-बिक्री पर लगा बैन

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 चंडीगढ़
 हरियाणा में दूध की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च और रसायनों से बने पनीर और घी की बिक्री को अब अपराध माना जाएगा। प्रदेश सरकार ने एनालॉग या नान-डेयरी पनीर और घी के उत्पादन व बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे सामान को न केवल जब्त कर नष्ट किया जाएगा, बल्कि दोषी को जेल की सजा भी काटनी पड़ सकती है।

ढाबों और होटलों में मक्खन के नाम पर परोसे जा रहे वनस्पति तेल तथा देसी घी के नाम पर मिठाइयों में पाम आयल के इस्तेमाल से लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने यह कदम उठाया है।

बाजार में बिक रहा 70 फीसदी पनीर नकली
हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की सरकारें पहले ही नकली पनीर और घी पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं। अब हरियाणा भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है। प्रदेश में स्थिति यह है कि बाजार में बिक रहा 70 प्रतिशत पनीर नकली है।
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एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक पनीर के कुल 285 नमूने लिए गए, जिनमें 200 नमूने फेल निकले। इनमें 171 निम्न स्तरीय और 29 असुरक्षित श्रेणी में पाए गए। अधिकतर निर्माता कच्चे दूध की बजाय दुग्ध पाउडर या वनस्पति तेल से छेना या पनीर तैयार कर रहे हैं।

त्योहारी मौसम शुरू होने से पहले ही नकली पनीर और मिलावटी घी का इस्तेमाल रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा आयुक्त डा. मनोज कुमार ने नियम अधिसूचित कर दिए हैं। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

अगर किसी पनीर या देसी घी को इस तरह बाजार में बेचा जाता है कि ग्राहक उसे असली दूध से बना उत्पाद समझे, तो उसे नकली या इमिटेशन डेयरी प्रोडक्ट की श्रेणी में माना जाएगा। एनालाग या नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण पर रोक के साथ ही ऐसे उत्पाद की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग, स्टोरेज और सप्लाई तथा थोक व खुदरा बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। पनीर व छेना के लिए कई मानक पूरे करने होंगे।

क्या होता है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर को बनाने में दूध की बजाय वनस्पति तेल या फैट, पाम आयल, स्टार्च, सोया या दूसरे पौधों से मिलने वाले प्रोटीन जैसी चीजों का उपयोग किया जाता है। स्टेबलाइजर, इमल्सीफायर और फ्लेवर मिलाए जाते हैं।

पैक्ड पनीर बेच रहे हैं तो पैकेट पर “नॉन-डेयरी” या “एनालॉग” लिखा होना अनिवार्य होगा। होटल-ढाबे में परोसे जा रहे पनीर को लेकर मेनू में “एनालॉग” लिखना पड़ेगा।

घी के नाम पर हो रहा ‘खेल’ “पूजा हेतु घी”, “दीया हेतु घी”, “वनस्पति घी”, “कुकिंग घी”, “टेबल घी” और “हवन हेतु घी के नाम पर वनस्पति तेलों व वनस्पति वसा से बना सामान बेचा जा रहा है। रासायनिक पदार्थ, सुगंध और कणिकायन कारक मिलने से सुगंधित हो जाता है। मिठाइयों में इनका खूब प्रयोग हो रहा है।

 

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