भोपाल में ‘मीडिया संवाद’: के. ए. बद्रीनाथ ने डीपफेक और एजेंडा नैरेटिव पर जताई चिंता”

Editor
4 Min Read

भोपाल

भोपाल में Sociyo Communications के ‘मीडिया संवाद’ में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मुख्य सलाहकार के. ए. बद्रीनाथ का संबोधन, डीपफेक व एजेंडा-आधारित नैरेटिव पर जताई गंभीर चिंता

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रविवार को भोपाल में Sociyo Communications द्वारा 'मीडिया संवाद' का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय "Misinformation, Disinformation and Agenda-Based Narratives" रहा, जिसमें मीडिया जगत की वर्तमान चुनौतियों, बढ़ते मीडिया संसाधनों के सदुपयोग एवं उनसे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यकम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के. ए. बदरीनाथ, मुख्य सलाहकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और वरिष्ठ पत्रकार हेमंत उपाध्याय ने सत्र को संबोधित किया।

सटीक जानकारी देना आज की सबसे बड़ी चुनौती: हेमंत उपाध्याय

कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट पत्रकार हेमंत उपाध्याय ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आज हर व्यक्ति के हाथ में सूचनाओं के विभिन्न माध्यम हैं, जिससे सूचनाओं का प्रवाह तो बढ़ा है, लेकिन उनकी सत्यता संदिग्ध हो गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के खतरों का जिक्र करते हुए उन्होंने संवेदनशील घटनाओं की 'AI जनरेटेड' फर्जी फोटो के वायरल होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "जहाँ पहले लोग 20 मिनट में पूरा न्यूज़ बुलेटिन देखते थे, वहीं आज 2 मिनट में 20 'ब्रेकिंग न्यूज़' पढ़ लेते हैं। बिना जांचे-परखे इन्हें सही मान लेना पत्रकारों के लिए सटीक जानकारी पहुँचाने की राह में एक बड़ी चुनौती बन गया है।"

डीपफेक और फेक नैरेटिव से बढ़ता खतरा: के. ए. बद्रीनाथ

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के. ए. बद्रीनाथ, मुख्य सलाहकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने संबोधन में 'डीपफेक' तकनीक के माध्यम से गढ़े जा रहे एजेंडा-आधारित नैरेटिव पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की वायरल AI फोटो, तथा बंगाल चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने जैसी भ्रामक सूचनाओं का उदाहरण दिया, जिन पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया से विवाद भी उत्पन्न हुआ।

उन्होंने RBI को लेकर चलाए गए उस फेक नैरेटिव का भी उल्लेख किया, जिसमें कैश बंद होने और उसे डिजिटल करेंसी में बदलने की अफवाह फैलाई गई थी, जिससे बाजार में उथल-पुथल मच गई। अंततः RBI को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज पत्रकारों के लिए सबसे कठिन कार्य 'पत्रकारिता' और 'डीपफेक' के बीच अंतर को पहचानना और उसे जनता के सामने लाना है।

कॉपी-फॉरवर्ड नहीं, रिसर्च आधारित समाचार पर हो जोर

वक्ताओं के संबोधन के बाद सभागार में उपस्थित मीडिया से जुड़े प्रबुद्ध जनों ने वक्ताओं से अपने प्रश्नों के माध्यम से संवाद किया। इस संवाद सत्र में यह बात रेखांकित हुई कि तकनीक आज एक दोधारी तलवार बन चुकी है, जिसके लाभ और हानि दोनों हैं। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में मीडिया के भीतर 'मिसइन्फॉर्मेशन' का प्रभाव बढ़ गया है, क्योंकि हम 'रिसर्च' के बजाय 'कॉपी-फॉरवर्ड' संस्कृति को महत्व देने लगे हैं। के. ए. बद्रीनाथ ने पत्रकारों से आह्वान किया कि वे फैक्ट और रिसर्च आधारित समाचारों को प्राथमिकता दें, ताकि समाज को सही और विश्वसनीय जानकारी मिल सके। कार्यक्रम का संचालन Akhileaks.com के संपादक अखिलेश सोलंकी ने किया।

कार्यक्रम के समापन में Sociyo Communications के संस्थापक डॉ. सुलभ सिंह ने सभी अतिथियों के प्रति अपनी कृतज्ञता एवं आभार ज्ञापित किया। अपने संबोधन में डॉ. सुलभ ने कहा कि हम श्रुति और स्मृति की परंपरा के संवाहक हैं, हमें सदैव इस बात का स्मरण रखना चाहिए। उन्होंने मीडिया में बढ़ती चुनौतियों पर विचार रखे। कार्यक्रम में भोपाल के प्रतिष्ठित पत्रकार, जनसंपर्क विशेषज्ञ, विज्ञापन जगत से जुड़ी हस्तियाँ एवं पत्रकारिता के छात्र उपस्थित रहे।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live