357 कनिष्ठ विश्लेषकों की नियुक्ति से दवा गुणवत्ता जांच को मिलेगी नई रफ्तार

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357 कनिष्ठ विश्लेषकों की नियुक्ति से दवा गुणवत्ता जांच को मिलेगी नई रफ्तार
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लखनऊ

उत्तर प्रदेश में जनस्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का तहत रविवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अंतर्गत चयनित 357 कनिष्ठ विश्लेषक (औषधि) अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। वर्ष 2024 के विज्ञापन के सापेक्ष वर्ष 2026 में पूरी हुई यह भर्ती प्रक्रिया उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से पारदर्शी तरीके से सम्पन्न हुई है। इन नियुक्तियों के माध्यम से दवा की गुणवत्ता जांच की रफ्तार बढ़ेगी। साथ ही प्रदेश की सभी 18 प्रयोगशालाएं पूर्ण रूप से संचालित होंगी और विश्लेषण क्षमता में भी प्रतिवर्ष 4 गुणा से अधिक की वृद्धि होगी। 

औषधि गुणवत्ता जांच में आएगी तेजी

कनिष्ठ विश्लेषक (औषधि) की नियुक्ति से प्रदेश में दवा एवं सौंदर्य प्रसाधनों की गुणवत्ता जांच व्यवस्था को नई गति मिलेगी। इनका प्रमुख दायित्व औषधि एवं कास्मेटिक्स एक्ट 1940 तथा संबंधित नियमों के अंतर्गत विभिन्न जनपदों से औषधि निरीक्षकों द्वारा संग्रहित नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण करना है। यह परीक्षण न केवल दवाओं की शुद्धता, प्रभावशीलता और मानक अनुरूपता सुनिश्चित करेगा, बल्कि नकली, मिलावटी और मानकहीन उत्पादों की पहचान कर उनके विरुद्ध त्वरित कार्रवाई का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। इससे बाजार में उपलब्ध दवाओं और कास्मेटिक उत्पादों की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी स्थापित होगी, जिससे आम जनता को सुरक्षित और भरोसेमंद उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षण से प्रदेश की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली और अधिक सुदृढ़ होगी, जो जनस्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

18 प्रयोगशालाओं के संचालन से बढ़ेगी क्षमता

प्रदेश में औषधि गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए अब हर मण्डलीय मुख्यालय पर आधुनिक औषधि प्रयोगशालाओं की स्थापना कर कुल 18 प्रयोगशालाओं को फर्नीचर एवं अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। पहले जहां केवल 5 प्रयोगशालाओं के सहारे पूरे प्रदेश की जांच व्यवस्था सीमित थी, वहीं अब यह नेटवर्क व्यापक और सशक्त रूप में सामने आया है। कनिष्ठ विश्लेषकों की नियुक्ति के बाद ये सभी प्रयोगशालाएं पूर्ण क्षमता के साथ कार्य करेंगी, जिससे नमूनों के परीक्षण में तेजी आएगी और लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी होगी। इससे न केवल समयबद्ध जांच सुनिश्चित होगी, बल्कि गुणवत्ता नियंत्रण की निगरानी भी अधिक प्रभावी और व्यापक हो सकेगी। यह व्यवस्था प्रदेश में दवा और कास्मेटिक उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ-साथ जनस्वास्थ्य सुरक्षा को एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।

4 गुना से अधिक बढ़ेगी परीक्षण क्षमता
नई नियुक्तियों के बाद प्रदेश में औषधि नमूनों की जांच क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की जाएगी। अब तक जहां प्रतिवर्ष लगभग 12,000 नमूनों का ही परीक्षण संभव था, वहीं यह क्षमता बढ़कर 54,500 नमूने प्रतिवर्ष तक पहुंच जाएगी, जो चार गुना से अधिक की वृद्धि है। इससे न केवल परीक्षण की गति तेज होगी, बल्कि अधिक व्यापक स्तर पर दवाओं और कास्मेटिक उत्पादों की गुणवत्ता की निगरानी भी सुनिश्चित की जा सकेगी। बढ़ी हुई क्षमता के साथ नमूनों की समयबद्ध जांच संभव होगी, जिससे बाजार में उपलब्ध मानकहीन या संदिग्ध उत्पादों पर शीघ्र नियंत्रण किया जा सकेगा। 

पारदर्शी भर्ती से सभी वर्ग के युवाओं को मिला अवसर

इस भर्ती प्रक्रिया में कुल 357 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिसमें 143 अनारक्षित, 75 अनुसूचित जाति, 06 अनुसूचित जनजाति, 97 अन्य पिछड़ा वर्ग एवं 36 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थी शामिल हैं। यह चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और मेरिट आधारित रही, जिसमें किसी भी प्रकार की सिफारिश या हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं रही। 11 मार्च 2026 को घोषित परिणाम सरकार की तेज, जवाबदेह और सुशासन आधारित कार्यप्रणाली का प्रमाण है। यह भर्ती न केवल विभिन्न वर्गों को संतुलित प्रतिनिधित्व प्रदान करती है, बल्कि युवाओं में यह विश्वास भी मजबूत करती है कि मेहनत और प्रतिभा के आधार पर ही सफलता संभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में पारदर्शी भर्ती व्यवस्था ने नई कार्यसंस्कृति स्थापित की है, जिससे युवाओं को बिना किसी भेदभाव के समान अवसर प्राप्त हो रहे हैं और सरकारी तंत्र में भरोसा और सशक्त हुआ है।

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