केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक दिल्ली में, यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज

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लखनऊ

 उत्‍तर प्रदेश में बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्‍तार जल्‍द ही हो सकता है। पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों के बाद योगी आदित्‍यनाथ सरकार में कुछ नए मंत्री शामिल हो सकते हैं। शनिवार को दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी दिल्ली रवाना हो गए। सूत्रों के अनुसार, तीनों राष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात करेंगे। इससे यूपी में बड़े बदलावों की चर्चा फिर तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कई बदलावों पर मंत्रणा हो सकती है। चुनाव की तैयारी, यूपी मंत्रिमंडल विस्तार के साथ क्षेत्रीय संतुलन पर मंथन हो सकता है। खासतौर से पश्चिमी यूपी के समीकरण साधने और क्षेत्रीय संतुलन पर चर्चा होगी।

मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं नए चेहरे
पश्चिम बंगाल चुनाव निपटाने के बाद भाजपा का पूरा ध्‍यान अब उत्‍तर प्रदेश पर है। सूत्रों का कहना है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कई मंत्रियों के विभागों में बदलाव हो सके हें। मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरों को भी शामिल किया जा सकता है। इसके साथ ही पंकज चौधरी के नेतृत्‍व वाली यूपी बीजेपी संगठन में भी एक नई टीम देखने को मिल सकती है। बताया जा रहा है कि जिन नेताओं ने संगठन को मजबूत करने में अहम योगदान दिया है, उनको सरकार में जगह मिल सकती है। इसके अलावा संगठन को और मजबूत करने, बूथ स्‍तर पर पकड़ बनाने और चुनावी मुद्दों को धार देने पर चर्चा होगी।

अप्रैल में विनोद तावड़े ने सीएम योगी से की थी मुलाकात
बीते अप्रैल में भाजपा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े ने सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। माना गया कि तावड़े ने सीएम से प्रदेश भाजपा की नई टीम, निगम-आयोग में खाली पदों पर नियुक्ति के साथ मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल होने वाले संभावित चेहरों को लेकर चर्चा की। वह वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा से भी मिले थे।

खराब कामकाज वाले मंत्रियों को संगठन में भेजा जा सकता है
कई मंत्रियों के कामकाज से संगठन खुश नहीं है। माना जा रहा है कि जिनका काम खराब है, उन्हें संगठन में भेजा जा सकता है। कुछ को केंद्रीय संगठन और कुछ को प्रदेश संगठन में मौका मिल सकता है। वहीं, संगठन में जिन्हें एमएलसी या विधायक बनाया जा चुका है, उन्हें संगठन के काम से मुक्त किया जा सकता है।

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