झारखंड राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, सीट बंटवारे पर फंसा पेच

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झारखंड राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, सीट बंटवारे पर फंसा पेच
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रांची

 झारखंड में अगले कुछ दिनों बाद होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गयी है। दो सीटों पर होने वाले इस चुनाव में सत्ता पक्ष यानी इंडिया गठबंधन फिलहाल मजबूत स्थिति में दिख रहा है, लेकिन विपक्षी एनडीए भी बिहार मॉडल की तर्ज पर एक सीट के लिए समीकरण साधने में जुटा है।

जेएमएम का रुख कांग्रेस के साथ अब सहज नहीं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के कुछ महीनों में झारखंड मुक्ति मोर्चा का रुख सहयोगी दल कांग्रेस के साथ पूरी तरह से सहज नहीं दिख रहा है। जिस तरह से असम विधानसभा में जेएमएम के कांग्रेस के कोई तालमेल किए बगैर अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया, उससे कांग्रेस नेतृत्व को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। असम में हेमंत सोरेन ने एक सप्ताह से अधिक समय तक कैंप कर दर्जनों चुनावी सभाएं की, जिससे वहां गैर भाजपा मतों में बंटवारे की संभावना जताई जा रही है। असम में हेमंत सोरेन के साथ कल्पना सोरेन ने चाय बगान में रहने वाले झारखंडी मूल के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की।

दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी जेएमएम ने कांग्रेस की जगह ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के पक्ष में कई चुनावी सभाओं को संबोधित किया। इससे भी कांग्रेस और जेएमएम के बीच दूरियां बढ़ने के संकेत मिले। लेकिन झारखंड में अब भी हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस और आरजेडी शामिल है।

असम और पश्चिम बंगाल की सियासत का झारखंड में भी दिखेगा असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असम और पश्चिम बंगाल में झामुमो की अलग राह का सीधा असर झारखंड की सियासत पर भी पड़ सकता है। असम में जेएमएम और कांग्रेस के बीच बढ़ी दूरी ने विपक्षी एकता पर सवाल खड़े किये हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ झुकाव से भी झारखंड में दोनों दलों के रिश्तों में खटास की आशंका बढ़ गई। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के दौरान अंदरूनी असंतोष या रणनीतिक दूरी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

एक सीट जीतने के लिए 27-28 विधायकों के वोटों की आवश्यकता
झारखंड में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए आम तौर पर 27-28 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है। यह संख्या झारखंड विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 81 के आधार पर तय होती है। जहां प्रथम और द्वितीय वरीयता के मतों से एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा चुनाव होता है।

सीट बंटवारे को लेकर पेच फंसने की आशंका
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 56 विधायक का समर्थन प्राप्त है, जो दोनों सीटों पर कब्जा करने के लिए पर्याप्त है। लेकिन जिस तरह से जेएमएम की ओर से कांग्रेस की अनदेखी की जा रही है। इसके कारण सीट बंटवारे को लेकर पेच फंस सकता है। जेएमएम अपने बल पर एक सीट निकालने में सक्षम है, जबकि दूसरी सीट पर जीत के लिए कांग्रेस विधायकों का समर्थन जरूरी है।

इन परिस्थितियों में जेएमएम की ओर से दूसरी सीट के लिए किसी ऐसे राजनेता या उद्योगपति को प्रत्याशी बनाया जा सकता है या समर्थन दिया जा सकता है, जो अपने बलबूते कई विधायकों का समर्थन हासिल कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में झारखंड के एक पूर्व सांसद के नाम की भी चर्चा हो रही है।

 

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