सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पर हाईकोर्ट के फैसले का मौलाना शहाबुद्दीन ने किया समर्थन

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बरेली

यूपी के बरेली शहर में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले का समर्थन किया है। मौलाना ने शरीयत का हवाला देते हुए इस फैसले को सही बताया है।

शनिवार को मौलाना शहाबुद्दीन ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि कोर्ट का निर्णय पूरी तरह सही और दुरुस्त है। शरियत के नजरिये का हवाला देते हुए मौलाना ने कहा कि अगर किसी जगह नमाज पढ़ने से विवाद की स्थिति बनती हो या किसी को आपत्ति हो सकती हो, तो ऐसी जगहों पर नमाज पढ़ने से बचना चाहिए। मौलाना ने आगे कहा कि इस्लाम अमन और भाईचारे का पैगाम देता है, इसलिए ऐसे किसी भी कार्य से बचना जरूरी है जिससे सामाजिक सौहार्द्र प्रभावित हो।

दरअसल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर बड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक स्थान सबके लिए है। धार्मिक आजादी के नाम पर इस पर कब्जे की अनुमति नहीं दी जा सकती। जब सार्वजनिक भूमि की बात आती है तो ये साफ है कि ये सबके लिए है और कानून से कंट्रोल होती है। कोई भी शख्स नियमित धार्मिक आयोजनों के इस्तेमाल के लिए इस पर दावा नहीं कर सकता।

दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए ऐसा कहा। अदालत ने आबादी भूमि के हिस्से के निजी परिसर में नमाज की अनुमति मांगने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा कि इस स्थान के इस्तेमाल पर आम जनता के आने-जाने और सुरक्षा पर असर पड़ता है। यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह सार्वजनिक स्थानों पर सभी की बराबर पहुंच करे।

आपराधिक केस है तो शासनादेश के तहत जारी करें चरित्र प्रमाण पत्र : हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अन्यआदेश में स्पष्ट किया है कि केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर चरित्र प्रमाण पत्र रोका नहीं जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को शासन द्वारा जारी नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार याची को प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा एवं न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने नीतीश कुमार की याचिका पर उसके अधिवक्ता निर्भय कुमार भारती व सरकारी वकील को सुनकर दिया है। याची ने याचिका में एडीजी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें याची का चरित्र प्रमाण पत्र आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया था कि याची के विरुद्ध आपराधिक मामला लंबित है।

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