राजस्थान में ‘टीचिंग एसोसिएट’ भर्ती पर बवाल, युवाओं ने किया जोरदार विरोध

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जयपुर

 राजस्थान के उच्च शिक्षा विभाग में भर्ती को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा कॉलेजों में 3,540 पदों पर 'टीचिंग एसोसिएट' की संविदा भर्ती निकालने के फैसले ने प्रदेश के शिक्षित युवाओं में आक्रोश भर दिया है. युवा इस योजना को 'शिक्षावीर' करार देकर इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं.

नेट और PhD धारकों के साथ धोखा
विरोध कर रहे युवाओं का कहना है कि जिन्होंने बरसों मेहनत कर NET, JRF और PhD जैसी डिग्रियां हासिल की हैं, उनके भविष्य के साथ यह खिलवाड़ है. युवाओं का तर्क है कि सरकार स्थाई भर्ती करने के बजाय अस्थायी नियुक्तियां कर रही है, जिससे उच्च शिक्षा का स्तर गिरेगा. छात्रों का कहना है कि यदि कॉलेजों में स्थाई आचार्य नहीं होंगे, तो शोध (Research) और नए विमर्श पूरी तरह ठप हो जाएंगे, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों की स्किल और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा.

वेतन पर भड़के युवा
भर्ती के विरोध का सबसे बड़ा कारण तय किया गया मानदेय है. टीचिंग एसोसिएट के लिए मात्र 28,500 रुपये वेतन तय किया गया है. छात्र नेताओं का कहना है कि यह राशि एक तृतीय श्रेणी शिक्षक से भी कम है. UGC के मानकों के अनुसार, एक सहायक आचार्य की बेसिक पे ही 57,700 रुपये से शुरू होती है. ऐसे में आधे वेतन पर उच्च शिक्षित युवाओं से काम कराना उनका अपमान है.

खाली पदों से जूझते विश्वविद्यालय
प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों की हालत पहले ही जर्जर है. कॉलेजों में शैक्षणिक स्टाफ के 32% पद खाली पड़े हैं. प्रदेश की 15 में से 7 यूनिवर्सिटी ऐसी हैं जहां एक भी नियमित शिक्षक नहीं है. राजस्थान विश्वविद्यालय में 60% शिक्षकों के पद रिक्त हैं.

सियासी पारा चढ़ा, कांग्रेस ने घेरी सरकार
अब इस मुद्दे पर सियासत भी गर्मा गई है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने सरकार पर हमला बोला है. विपक्ष का आरोप है कि सेना में 'अग्निवीर' की तर्ज पर अब सरकार 'शिक्षावीर' और 'डॉक्टरवीर' बनाकर युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रही है. युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि संविदा भर्ती वापस लेकर स्थाई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र होगा.

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