अजमेर दरगाह-शिव मंदिर विवाद: जिला अदालत में लंबी सुनवाई, फैसला सुरक्षित

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अजमेर

अजमेर दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे पर जिला कोर्ट में लंबी सुनवाई हुई. दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे को लेकर दायर याचिका पर शनिवार (2 मई) को जिला न्यायालय में सुनवाई हुई. इस दौरान सभी पक्षों ने अपने-अपने दावे के समर्थन में कानूनी तर्क और दस्तावेज पेश किए. हिंदू सेना और महाराणा प्रताप सेना के पदाधिकारियों द्वारा याचिका दायर की गई है. सुनवाई के दौरान करीब 12 अलग-अलग याचिकाओं पर बहस हुई, जिनमें कई पक्षकारों ने खुद को इस मामले में शामिल करने की मांग की. मामले से जुड़ी 12 याचिकाओं पर बहस के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया है.

अब तय होगा- केस में पक्षकार कौन?
हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने बताया, "अदालत ने सभी नई अर्जियों पर सुनवाई की और सभी पक्षों को विस्तार से सुना. अब देखते हैं कौन पक्षकार बनता है और किसे खारिज कर दिया जाता है." मामले में याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता संदीप कुमार ने कहा कि कई याचिकाओं का विरोध किया गया है, क्योंकि उनमें पर्याप्त तथ्य और आधार नहीं हैं.

अजमेर दरगाह में शिव मंदिर के दावे को लेकर दायर याचिका पर शनिवार को जिला न्यायालय में विस्तृत सुनवाई हुई। याचिका हिंदू सेना और महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्षों द्वारा दायर की गई है। सुनवाई के दौरान दरगाह के दीवान और खादिमों ने भी पक्षकार बनने की मांग की।

महाराणा प्रताप सेना ने भी पेश की याचिका
विष्णु गुप्ता के अधिवक्ता संदीप कुमार ने कहा कि 2 मई का दिन बहुत महत्वपूर्ण रहा और हमारे पक्ष के लिए खासा अहम रहा. अधिवक्ता के मुताबिक, एक याचिकाकर्ता फरार है और उसके खिलाफ नॉन-बिलेबल वारंट जारी है. एक याचिकाकर्ता ऐसे भी थे जो वादी पक्ष का सहयोग करना चाहते थे- जैसे महाराणा प्रताप सेना के राजवर्धन सिंह, लेकिन वे तथ्यों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं कर सके.

दरगाह की ओर से भी आवेदन पेश
दरगाह के दीवान और खादिमों की ओर से भी पक्षकार बनने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया. अधिवक्ता सिद्धार्थ ने कहा, "मैंने दरगाह दीवान साहब की ओर से पक्षकार बनाए जाने के प्रार्थना पत्र की पैरवी की थी. सभी अर्ज़ियों को सुनकर कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रखा है. उम्मीद है कि आगामी तारीख पर सुनाया जाएगा."

अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने सभी आवेदनों पर विचार करने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है और अगली सुनवाई में फैसला सुनाया जा सकता है. वरिष्ठ अधिवक्ता एपी सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप सेना की ओर से राजवर्धन सिंह परिहार मुख्य याचिकाकर्ता हैं. इस मामले में अन्य लोगों ने भी आवेदन लगाए थे.

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