सावन 2026 की तारीखें घोषित, जानें कब शुरू होंगे सोमवार व्रत और कांवड़ यात्रा

Editor
4 Min Read

 हिंदू धर्म में श्रावण यानी सावन का महीना अत्यंत पवित्र, मंगलकारी और भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे उत्तम माना गया है. यह पूरा महीना देवों के देव महादेव और माता पार्वती को समर्पित होता है. मान्यता है कि सावन के दौरान जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं, व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. आइए जानते हैं कि साल 2026 में पावन सावन माह की शुरुआत कब से हो रही है, सावन के सोमवार व्रतों की सही तिथियां क्या हैं और इस दौरान कौन-कौन से प्रमुख त्योहार मनाए जाएंगे.

सावन 2026 कब से कब तक?
द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के अगले दिन यानी श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से सावन की शुरुआत होती है. वर्ष 2026 में सावन महीने का आरंभ 30 जुलाई 2026, गुरुवार से हो रहा है, जिसका समापन 27 अगस्त 2026, गुरुवार को श्रावण पूर्णिमा, रक्षाबंधन के दिन होगा.

कांवड़ यात्रा अवधि: 30 जुलाई 2026 से 11 अगस्त 2026 तक

सावन सोमवार व्रत 2026 की पूरी लिस्ट (Sawan Somwar 2026 Dates)

सावन के सोमवार का व्रत बेहद खास माना जाता है. इस बार सावन के महीने में कुल 4 सोमवार पड़ेंगे.
पहला सावन सोमवार: 03 अगस्त 2026
दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026

मंगला गौरी व्रत तिथियां
सावन के प्रत्येक मंगलवार को माता पार्वती को समर्पित मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. यह व्रत अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान प्राप्ति के लिए रखा जाता है.

पहला मंगला गौरी व्रत: 04 अगस्त 2026
दूसरा मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त 2026
तीसरा मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त 2026
चौथा मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त 2026

सावन शिवरात्रि 2026
सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि मनाई जाती है. इस दिन कांवड़िए हरिद्वार और अन्य धार्मिक स्थलों से लाया गया गंगाजल भगवान शिव को अर्पित करते हैं. सावन शिवरात्रि इस बार 11 अगस्त 2026, मंगलवार के दिन मनाई जाएगी.

सावन में शिव पूजन की सरल विधि
सावन के दिनों में, विशेषकर सोमवार को, सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद शिव व्रत व पूजा का संकल्प लें. इसके बाद  मंदिर या घर पर ही शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल, गंगाजल और कच्चा दूध अर्पित करें. फिर, शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, सफेद चंदन, अक्षत और आंकड़े के फूल चढ़ाएं. आखिरी में धूप-दीप जलाकर शिव चालीसा का पाठ करें, ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करें और महादेव को फल या मिठाई का भोग लगाएं.

महामृत्युंजय मंत्र
सावन के महीने में इस शक्तिशाली मंत्र का जाप करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है और सभी भय दूर होते हैं.

ऊं त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्.
उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

TAGGED: ,
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live