पढ़ाई में पीछे छूटे बच्चों को मुख्यधारा में लाएगी योगी सरकार, कैच-अप शिक्षण अभियान को मिलेगी नई गति

Editor
4 Min Read

लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी शिक्षा में अधिगम अंतर (लर्निंग गैप) को समाप्त करने के लिए कैच-अप शिक्षण अभियान को और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों, बीआरसी, बीएसए कार्यालयों और डायट में कैच-अप शिक्षण, निपुण लक्ष्य, कक्षा शिक्षण की 10 प्रभावी प्रथाओं तथा रीडिंग कैंपेन से संबंधित आईईसी सामग्री 31 जुलाई तक प्रदर्शित की जाएगी। 

महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने इस संबंध में सहायक शिक्षा निदेशकों (बेसिक), डायट प्राचार्यों, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों, जिला समन्वयकों, एसआरजी तथा एआरपी को समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए हैं। 

निर्देशों में कहा गया है कि संबंधित आईईसी सामग्री का मुद्रण कराकर उसे विद्यालयों, बीआरसी, बीएसए कार्यालयों तथा डायट में प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किया जाए ताकि शिक्षक प्रतिदिन इन शैक्षणिक संदेशों का उपयोग कक्षा शिक्षण में कर सकें। इसके माध्यम से पूरे प्रदेश में दक्षता आधारित शिक्षण की एक समान कार्यसंस्कृति विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। 

योगी सरकार का मानना है कि विद्यालयों में एक समान शैक्षणिक संदेश और स्पष्ट अधिगम लक्ष्य उपलब्ध होने से शिक्षकों के कार्य को दिशा मिलेगी और बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार आएगा। कैच-अप शिक्षण, निपुण लक्ष्य, कक्षा शिक्षण की प्रभावी प्रथाओं और रीडिंग अभियान को एकीकृत रूप से लागू कर योगी सरकार प्रदेश में बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

कैच-अप शिक्षण के लिए तैयार की गई 15 सूत्रीय रणनीति

अभियान के प्रभावी संचालन के लिए 15 सूत्रीय रणनीति तैयार की गई है। इसके तहत अधिगम स्तर से पीछे रह गए बच्चों की पहचान, आधारभूत दक्षताओं का आकलन, स्तरानुसार समूह बनाकर शिक्षण, दैनिक एवं साप्ताहिक शिक्षण योजना, गतिविधि आधारित शिक्षण, टीएलएम का प्रभावी उपयोग, नियमित अभ्यास, सतत मूल्यांकन, रीडिंग गतिविधियों को बढ़ावा, अभिभावकों की सहभागिता तथा बच्चों की प्रगति की निरंतर निगरानी पर विशेष बल दिया गया है। उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को उसकी कक्षा के अनुरूप अधिगम स्तर तक पहुंचाना और सीखने की कमी को समयबद्ध ढंग से दूर करना है।

'निपुण लक्ष्य' से स्पष्ट होंगे अधिगम मानक

विद्यालयों में प्रदर्शित किए जाने वाले 'निपुण लक्ष्य' पोस्टरों में बालवाटिका से लेकर कक्षा 5 तक भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन और अंग्रेजी के स्पष्ट अधिगम लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इससे शिक्षक और विद्यार्थियों दोनों के सामने प्रत्येक कक्षा की अपेक्षित दक्षताएं स्पष्ट रहेंगी तथा शिक्षण और मूल्यांकन को परिणाम आधारित बनाया जा सकेगा। 

कक्षा शिक्षण की 10 प्रभावी प्रथाओं को मिलेगा बढ़ावा

आईईसी सामग्री में कक्षा शिक्षण की 10 प्रभावी प्रथाओं को भी शामिल किया गया है। इनमें बच्चों की सक्रिय सहभागिता, गतिविधि आधारित शिक्षण, खुले प्रश्नों का प्रयोग, लेखन एवं पठन अभ्यास, टीएलएम का प्रभावी उपयोग, सतत मूल्यांकन, नियमित प्रतिपुष्टि और सहयोगात्मक अधिगम जैसी शिक्षण पद्धतियों को अपनाने पर बल दिया गया है। इन प्रथाओं का उद्देश्य कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाना है। 

रीडिंग कैंपेन से मजबूत होगी पठन संस्कृति

आईईसी सामग्री में रीडिंग कैंपेन को भी प्रमुखता दी गई है। विद्यालयों में नियमित पठन गतिविधियां, रीडिंग कॉर्नर, पुस्तक चर्चा, कहानी वाचन और अन्य नवाचारी प्रयासों के माध्यम से बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने तथा भाषा दक्षता को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इससे बच्चों की समझ, अभिव्यक्ति और अधिगम क्षमता में निरंतर सुधार होगा।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live