भारत-UK FTA लागू होते ही बड़ा असर, सोना-चांदी और हीरे की पहली खेप जीरो ड्यूटी पर रवाना

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भारत-UK FTA लागू होते ही बड़ा असर, सोना-चांदी और हीरे की पहली खेप जीरो ड्यूटी पर रवाना
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नई दिल्ली
 भारत और यूके के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आज से लागू हो रहा है। इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए बांग्लादेश और चीन के मुकाबले बेहतर स्थिति में आने की उम्मीद है। साथ ही भारतीय सर्विस प्रोवाइडर्स और प्रोफेशनल्स के लिए ज्यादा मौके मिलने की संभावना है। भारत के लिए बहुत बड़ा मौका है क्योंकि यूके में होने वाले 949 अरब डॉलर के इंपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी 2% से भी कम है।

₹27 करोड़ के आभूषण रवाना 
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता स्थित छह निर्यातकों द्वारा करीब 27 करोड़ रुपये मूल्य की ज्वेलरी भेजी गई है. जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC)  का कहना है कि UK के साथ मुक्त व्यापार समझौते के तहत शून्य शुल्क पर वहां के बाजार में एंट्री के द्वार खुल गए हैं और ब्रिटेन को भारत का पहला आभूषण निर्यात किया गया है। 

GJEPC पूर्वी क्षेत्र के अध्यक्ष पंकज पारेख के हवाले से पीटीआई की रिपोर्ट में कहा गया कि India-UK FTA लागू होने के दिन से ही ब्रिटेन के बाजार में भारतीय निर्यात पर आयात शुल्क शून्य हो गए गए और भारत से 27 करोड़ रुपये मूल्य के आभूषणों को सीईटीए के तहत निर्यात के लिए हरी झंडी दिखाई गई, जिसे दो फीसदी आयात शुल्क की छूट का सीधा लाभ मिलेगा। 

कई साल की बातचीत और एक साल से ज्यादा समय तक चली लागू करने की प्रक्रिया के बाद यह एग्रीमेंट लागू होने जा रहा है। टीओआई के मुताबिक कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने मंगलवार को कहा कि हमारा लक्ष्य अगले तीन-चार साल में द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। यूके ने 117 आइटम्स छोड़कर सभी प्रोडक्ट्स के लिए जीरो-टैरिफ व्यवस्था लागू की है। इससे भारतीय टेक्सटाइल्स, फूड प्रोडक्ट्स, लेदर और फुटवियर, इंजीनियरिंग गुड्स और फार्मा सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होगा।

FTA से आभूषण उद्योग को बढ़ावा 
जेम एंड ज्वैलरी परिषद की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि भारत और ब्रिटेन के बीच इस मुक्त व्यापार समझौते से बड़े बाजार तक पहुंच में सुधार होने के साथ ही रोजगार के मौके बढ़ेंगे. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के रत्न और आभूषण उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। 

जीजेईपीसी के चेयरमैन किरित भंसाली ने कहा कि यह FTA भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के 4 अरब डॉलर के आभूषण आयात बाजार में महत्वपूर्ण लाभ दिलाएगा. उन्होंने कहा, Zero Duty Export के साथ, उम्मीद है कि अगले 3 सालों में ब्रिटेन को भारत के रत्न और आभूषण निर्यात में करीब 2.5 अरब डॉलर की वृद्धि होगी. उन्होंने इस समझौते के लागू कराने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को दिया। 

99% भारतीय निर्यात पर 'Zero Duty'
भारत-यूके एफटीएक के बारे में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सीईटीए और सामाजिक सुरक्षा समझौते लागू हो गए हैं, जिससे भारत के लगभग 99% निर्यात के लिए शून्य शुल्क बाजार पहुंच प्राप्त हो गई है, जो व्यापार मूल्य के लगभग 100% को कवर करता है। 

इलेक्ट्रिक गाड़ियां पर टैरिफ
अग्रवाल ने कहा कि सरकार 12,000 प्रोडक्ट्स में से 89.5% पर ड्यूटी हटाने या कम करने पर सहमत हुई है। एफटीए के तहत 64% से ज्यादा प्रोडक्ट्स को भारत में तुरंत ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी। बाकी प्रोडक्ट्स के लिए ड्यूटी को धीरे-धीरे खत्म करने का वादा किया गया है। कारों समेत 4.4% टैरिफ लाइन वाले 536 और आइटम्स पर ड्यूटी में कटौती की जाएगी। पहले पांच साल के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियों को इस समझौते से अलग रखा गया है।

कॉमर्स डिपार्टमेंट में एडिशनल सेक्रेटरी दर्पण जैन ने कहा कि डेयरी, अनाज और कई कृषि उत्पाद जैसे संवेदनशील सेक्टर को एफटीए में शामिल नहीं किया गया है। सर्विस की डिजिटल डिलीवरी के लिए भी रास्ते पूरी तरह खोल दिए गए हैं। इससे देश में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स को बढ़ावा मिलेगा। इन सेंटर्स में कई ग्लोबल दिग्गज कंपनियां दिलचस्पी दिखा रही हैं जो भारत में कुशल और सस्ते मैनपावर का फायदा उठाना चाहती हैं।

शराब और गाड़ियां होंगी सस्ती
ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर टैरिफ शुरू में 150% से घटाकर 75% किया जाएगा और फिर 10 साल में यह 40% तक आ जाएगा, जबकि ब्रिटिश ऑटोमोबाइल पर ड्यूटी को कोटा-आधारित सिस्टम के तहत धीरे-धीरे कम किया जाएगा। इसके तहत ब्रिटेन से आने वाली ऐसी कारों पर टैरिफ 110% से चरणबद्ध ढंग से घटकर 10% तक रह जाएगा। करार में कारों के कम ड्यूटी पर आयात के लिए एक कोटा तय किया गया है। सरकार ने कोटा आधारित छूट की मंजूरी पाने की प्रक्रिया नोटिफाई कर दी है।

डबल कंट्रीब्यूशन कनवेंशन
बिजनेस विजिटर्स और प्रोफेशनल्स के लिए वीजा व्यवस्था ज्यादा साफ-सुथरी होगी। साथ ही यूके की कंपनियों को डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन से भी फायदा होगा क्योंकि उन्हें भारत से भेजे गए कर्मचारियों के लिए पांच साल तक सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन नहीं करना होगा। अभी, भारतीय कर्मचारी और उनके एम्प्लॉयर यूके के नेशनल इंश्योरेंस सिस्टम में सैलरी का 23% हिस्सा जमा करते हैं।

जैन ने कहा कि यह कंट्रीब्यूशन एक तरह का टैक्स है क्योंकि कर्मचारी इसका फायदा नहीं उठा पाते हैं। डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन यह पक्का करेगा कि वर्कर अपनी सोशल सिक्योरिटी के लिए डबल कंट्रीब्यूशन न दें। इससे सालाना 600 मिलियन डॉलर की बचत हो सकती है। इस कदम से 75,000 से ज्यादा भारतीय वर्करों और 900 से ज्यादा एम्प्लॉयर को फायदा होगा।

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