तलाकशुदा पत्नी के बच्चे को भी पिता की संपत्ति में बराबर का अधिकार, कोर्ट का अहम फैसला

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चंडीगढ़.

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि माता-पिता के तलाक के कारण किसी बच्चे का अपने पिता से कानूनी संबंध समाप्त नहीं होता और न ही उसे सरकारी सेवा नियमों के तहत मिलने वाली अनुकंपा वित्तीय सहायता के अधिकार से वंचित किया जा सकता है।

न्यायालय ने कहा कि तलाक पति-पत्नी के वैवाहिक संबंध को समाप्त कर सकता है, लेकिन पिता और उसके बच्चे के संबंध को समाप्त नहीं करता। जस्टिस संदीप मौदगिल ने यह महत्वपूर्ण फैसला सोनीपत निवासी हरियाणा सरकार के दिवंगत कर्मचारी बंसी लाल की दूसरी पत्नी की याचिका खारिज करते हुए दिया। अदालत ने उस आदेश को बरकरार रखा, जिसके तहत पहली पत्नी से जन्मे नाबालिग पुत्र को भी अनुकंपा वित्तीय सहायता में दूसरी पत्नी के बच्चे के बराबर हिस्सा देने का निर्णय लिया गया था।

बंसी लाल की पहली शादी पूजा रानी से हुई थी
मामले के अनुसार, बंसी लाल की पहली शादी पूजा रानी से हुई थी, जिससे 2010 में पुत्र का जन्म हुआ। 2019 में दोनों का आपसी सहमति से तलाक हो गया। इसके बाद बंसी लाल ने दूसरा विवाह किया और इस विवाह से भी एक संतान हुई। बंसी लाल की जुलाई 2024 में सेवा के दौरान मृत्यु हो गई। शुरुआत में पूरी अनुकंपा वित्तीय सहायता दूसरी पत्नी को स्वीकृत कर दी गई, लेकिन बाद में पहली पत्नी के पुत्र ने अपनी मां के माध्यम से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत के निर्देश पर सक्षम प्राधिकारी ने हरियाणा सिविल सेवा नियम 2019 के नियम 28 के तहत उसे भी बराबर का हकदार माना। दूसरी पत्नी ने दलील दी कि तलाक के समय पहली पत्नी को 30 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता दिया गया था और बच्चे की अभिरक्षा भी उसी के पास थी।

हाई कोर्ट ने दलील की अस्वीकार
हाई कोर्ट ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि स्थायी गुजारा भत्ता या बच्चे के भरण-पोषण के लिए दी गई राशि भविष्य में सेवा नियमों के तहत मिलने वाले वैधानिक अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि नियम 28 में 'आश्रित बच्चा' नहीं बल्कि 'पात्र बच्चा' शब्द का प्रयोग किया गया है। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कृषि संपत्ति में हिस्सेदारी और अनुकंपा वित्तीय सहायता दो अलग-अलग कानूनी क्षेत्र हैं। संपत्ति में हिस्सा मिलने के आधार पर किसी पात्र बच्चे को अनुकंपा वित्तीय सहायता से वंचित नहीं किया जा सकता।

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