नन्हे रूदाक्ष ने पेश की मिसाल, दो साल में लगाए 1500 पौधे, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

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नन्हे रूदाक्ष ने पेश की मिसाल, दो साल में लगाए 1500 पौधे, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
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पंचकूला.

नन्हे रूदाक्ष उपाध्याय का बड़ा कमाल देखकर आप भी सैल्यूट करेंगे। महज 5 वर्ष 2 माह का बाल पर्यावरण प्रेमी नवंबर 2024 से अब तक 1455 पौधे लगा चुका है। इनमें 1427 पौधे जीवित, सुरक्षित और विकसित हो रहे हैं। यह सफलता केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण का भी परिणाम है।

रुद्रांश अपने पिता भारतीय सेना की पश्चिमी कमान मुख्यालय में कार्यरत ज्ञानेंद्र उपाध्याय के साथ पंचकूला में रहते हैं। वह लगातार पौधारोपण कर हरियाली बढ़ाने का संदेश दे रहे हैं। रुद्रांश अपने पिता के साथ मिलकर पौधे लगाते हैं। पिता गड्ढे तैयार करते हैं, जबकि रुद्रांश स्वयं ढाई से तीन फुट ऊंचे पौधे लगाते हैं ताकि उनकी बेहतर वृद्धि हो सके। वह हर रविवार कम से कम सात पौधे लगाने का संकल्प निभाते हैं और समय-समय पर उनकी देखभाल भी करते हैं। पौधों की खरीद चंडीमंदिर आर्मी एरिया से की जाती है तथा प्रत्येक पौधे की जियो-टैगिंग और डिजिटल रिकाॅर्ड भी तैयार किया जाता है। ज्ञानेंद्र अपने बेटे की उपलब्धियां केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के टि्वटर पर संदेश डालते रहते थे। एक दिन ज्ञानेंद्र को शिवराज सिंह चौहान के कार्यालय से संदेश आया और इस योजना के अधीन सम्मानित किया जाएगा।

''रुद्रांश ग्रीन मिशन'' बना प्रेरणा का माध्यम
रुद्रांश अपने ''रुद्रांश ग्रीन मिशन'' के माध्यम से पंचकूला, चंडीगढ़ और चंडीमंदिर कैंट क्षेत्र में लगातार वृक्षारोपण कर रहे हैं। उनकी माता श्वेता दूबे, जो पेशे से अधिवक्ता हैं, भी इस अभियान में सक्रिय सहयोग देती हैं। पूरा परिवार पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी मानकर इस मिशन को आगे बढ़ा रहा है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया सम्मानित
नई दिल्ली में आयोजित ''वृक्ष मित्र कार्यक्रम'' में रुद्रांश को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ पौधारोपण किया। रुद्रांश ने अपने अभियान का विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड प्रस्तुत किया, जिसमें प्रत्येक पौधे की प्रजाति, स्थान और वर्तमान स्थिति का विवरण शामिल था। उनकी प्रतिबद्धता से प्रभावित होकर केंद्रीय मंत्री ने मंच पर उन्हें सम्मानित करते हुए एक पौधा और 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भेंट की। कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान सहित देशभर के कृषि वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने रुद्रांश के प्रयासों की सराहना की।

बच्चों के लिए प्रेरणा, समाज के लिए संदेश
इतनी कम उम्र में पर्यावरण संरक्षण के प्रति रुद्रांश की जागरूकता और समर्पण अन्य बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका संदेश स्पष्ट है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति वर्ष में कुछ पौधे भी लगाकर उनकी देखभाल करे, तो पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। रुद्रांश उपाध्याय की यह यात्रा केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता का ऐसा उदाहरण है, जो समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

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