राजस्थान में जेंडर सॉर्टेड सीमन तकनीक को मिली वैज्ञानिक पुष्टि

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 जयपुर
पशुपालकों की आय में वृद्धि, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने तथा देशी पशुधन के वैज्ञानिक नस्ल सुधार को गति देने के उद्देश्य से राजस्थान सरकार स्वदेशी जेंडर सॉर्टेड सीमन तकनीक के व्यापक उपयोग को गति दे रही है। कम लागत वाली इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली बछियों के जन्म की संभावना बढ़ती है, जिससे पशुपालकों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। इसी दृष्टिकोण के साथ राजस्थान आज देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल है, जहां इस तकनीक को बड़े स्तर पर किसानों के हित में अपनाया जा रहा है।

हाल ही में कुछ क्षेत्रों से जेंडर सॉर्टेड सीमन के परिणामों को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। राज्य सरकार ने पशुपालकों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए तत्काल संज्ञान लिया तथा संबंधित क्षेत्रों सहित विभिन्न स्थानों से रैंडम आधार पर सीमन के नमूने एकत्रित कर उनकी स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आई आई एस), बेंगलुरु भेजे। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुआ है कि विभाग द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे जेंडर सॉर्टेड सीमन में 88 से 96 प्रतिशत तक क्रियाशील एक्स-क्रोमोज़ोम वाले शुक्राणु पाए गए हैं, जो कि पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण, वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप एवं तकनीकी रूप से शुद्ध है। रिपोर्ट में सीमन की गुणवत्ता व तकनीक में किसी भी प्रकार की कमी नहीं पाई गई।

इस विषय पर पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत एवं पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. सुरेश चंद मीणा ने विभागीय अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत संवाद किया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि राज्य सरकार किसानों के हित में स्वदेशी जेंडर सॉर्टेड सीमन तकनीक के उपयोग के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित स्वदेशी तकनीक न केवल किफायती और प्रभावी है, बल्कि पशुपालन प्रणाली के अनुरूप विकसित होने के कारण पशुपालकों के लिए अधिक उपयोगी एवं लाभकारी सिद्ध होती है।

विभाग द्वारा निर्धारित वैज्ञानिक प्रोटोकॉल एवं कोल्ड चेन का पालन करते हुए प्रशिक्षित कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं के माध्यम से यह सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश में जून मध्य तक 6.24 लाख जेंडर सॉर्टेड सीमन डोज की आपूर्ति की जा चुकी है, जिनमें से 3.23 लाख डोज का उपयोग किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जेंडर सॉर्टेड सीमन से गर्भधारण करने वाले अधिकांश पशुओं में बछियों का जन्म दर्ज किया गया है, जो इस तकनीक की विष्वसनीयता एवं प्रभावशीलता का प्रमाण है।

बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए स्वदेशी जेंडर सॉर्टेड सीमन का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया जाए तथा फील्ड प्रोटोकॉल एवं कोल्ड चेन का कड़ाई से पालन किया जाए ताकि प्रत्येक पशुपालक तक इस तकनीक का पूरा लाभ पहुंच सके। राजस्थान सरकार ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक व अपुष्ट जानकारी पर विष्वास न करें तथा अपने निकटतम पशु चिकित्सालय अथवा पशुपालन विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर इस वैज्ञानिक एवं प्रमाणित तकनीक का लाभ उठाएं। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार वैज्ञानिक पशुपालन, स्वदेशी तकनीकों के संवर्धन तथा पशुपालकों की समृद्धि के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

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