ज्ञानवापी विवाद में नया मोड़, मुस्लिम पक्ष ने मध्यस्थता से किया इनकार

Editor
3 Min Read
ज्ञानवापी विवाद में नया मोड़, मुस्लिम पक्ष ने मध्यस्थता से किया इनकार
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

वाराणसी
वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से प्रस्तावित समझौता प्रक्रिया में मुस्लिम पक्ष शामिल नहीं होगा। अंजुमन इंतिज़ामिया मसाजिद कमेटी ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी स्तर पर इस पहल में भागीदारी नहीं करेगी। इस संबंध में संयुक्त सचिव एसएम यासीन की ओर से पत्र जारी कर निर्णय की जानकारी दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए मामले में सीधे फैसला देने के बजाय विशेष लोक अदालत और मध्यस्थता के माध्यम से दोनों पक्षों (हिंदू और मुस्लिम) को बातचीत से समाधान निकालने का निर्देश दिया था। इसे लेकर मंगलवार 14 जुलाई को जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित केंद्र में मध्यस्थता की तारीख तय की गई थी। यह भी कहा गया था कि इस बैठक के बाद आगामी 21 से 23 अगस्त तक तीन दिनों की विशेष लोक अदालत लगेगी, जहां दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट को पूरी उम्मीद थी कि इस बातचीत से कोई न कोई सकारात्मक रास्ता जरूर निकलेगा।

मुस्लिम पक्ष का क्या कहना है?
अब मुस्लिम पक्ष की ओर से इस बैठक में शामिल होने से ही इनकार कर दिया गया है। मुस्लिम पक्ष की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से भेजा गया निमंत्रण बाध्यकारी नहीं है। ऐसे में कमेटी ने विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि वह इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेगी। कमेटी का कहना है कि ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े सभी मामलों की कानूनी लड़ाई न्यायालय में जारी रहेगी और वह अपने अधिकारों की रक्षा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही करेगी।

वाराणसी कोर्ट में ज्ञानवापी से जुड़े 36 और हाईकोर्ट में 6 मुकदमे विचाराधीन
आदिविशेश्वर प्राचीन ज्योतिर्लिंग, शृंगार गौरी एवं ज्ञानवापी को लेकर इस समय वाराणसी कोर्ट में 36 मुकदमे और हाईकोर्ट में छह केस विचाराधीन हैं। जिला एवं सत्र न्यायालय में चल रही सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की वजह से केवल डेट लग रही है। इसके अलावा सिविल जज सीनियर, सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट, एडीजे की अदालतों में मुकदमा के साथ ही विभिन्न प्रार्थना पत्र लंबित हैं। इनमें जिला जज की अदालत में सबसे महत्वपूर्ण वाद शृंगार गौरी से जुड़ा है। इसमें बंद तहखाना सहित पूर्ण परिसर के सर्वेक्षण की मांग की गई है।

इसके साथ ही सिविल जज सीनियर डिविजन एफटीसी कोर्ट में वर्ष 1991 से चल रहे अतिप्राचीन स्वयंभू आदिविशेश्वर के दर्शन-पूजन और भव्य मंदिर के निर्माण की मांग की गई है। यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था। हाईकोर्ट ने एफटीसी कोर्ट को सभी पक्षों को सुनकर जल्द निस्तारण का आदेश दिया है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *